गोरखपुर : रोजेदारों को सहरी, इफ्तार, तरावीह का सही वक्त बनाते के लिए इस्लामिक सेंटर आफ इंडिया ने आइसीआइ रमजान हेल्पलाइन एप लाच किया है। इस एप को अपने शहर या क्षेत्र के हिसाब से सेट किया जा सकता है। खासकर यह एप उन रोजेदारों के लिए मददगार साबित होगा जो सफर में रहते हैं या उनके घर के आसपास मस्जिद नहीं है। एप में रमजान की अहमियत के साथ-साथ इफ्तार व सहरी का समय और शहर की प्रमुख मस्जिदों में तरावीह की नमाज का वक्त और खास दुआएं मिलेंगी।

मुकद्दस रमजान में रोजेदारों की सहूलियत के लिए विशेष तौर पर एप बनाया गया है। इसका मकसद रोजा रखने वालों को रोजे की अहमियत, क्षेत्रवार सहरी-इफ्तार का सही वक्त और शबे कद्र में पढ़ी जाने वाली दुआओं के बारे में बताना है। हालांकि पहले भी रमजान को लेकर एप बनाए गए थे, लेकिन बहुत कामयाब नहीं हुए। इस बार एप में नहीं चीजें जोड़ी गई हैं। हाफिज इरफान ने बताया कि आजकल सभी के हाथों में स्मार्ट फोन है इसलिए यह एप आसानी से लोगों को तक पहुंच जाएगा। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान भी एप काम आएगा।

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रहमत वाला है रमजान का पहला अशरा

यूं तो रमजान का पूरा महीना रोजेदारों के लिए खुदा की तरफ से अजमत, रहमत और बरकतों से लबरेज है। इस मुबारक महीने को तीन अशरों (हिस्सों) में बांटा किया है। पहला अशरा खुदा की रहमत वाला है। पहले अशरे में 10 दिनों तक अल्लाह की रहमत से सभी सराबोर होते रहेंगे।

एक से 10 रमजान यानी पहले अशरे में खुदा की रहमत नाजिल होती है। कहा जाता है कि रमजान का चांद नजर आते ही शैतान कैद कर लिया जाता है। जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और दोजख के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। अल्लाह अपनी रहमत से गुनाहगारों को अजाब से निजात देते हैं। नेक काम के सवाब में 70 गुना इजाफा कर दिया जाता है। अल्लाह के रसूल ने फरमाया है कि अगर लोगों को मालूम हो जाए कि रमजान क्या चीज है तो मेरी उम्मत साल के 12 महीने रमजान होने की तमन्ना करेगी। मर्द, बच्चे, औरत और बूढे़ रोजे के साथ नमाज-तरावीह में मशगूल रहते हैं। 11वीं रमजान से दूसरा अशरा शुरू होगा।

By Jagran