गोरखपुर : जीवन में कोई मुकाम हासिल करने के लिए कुछ नहीं अपितु बहुत कुछ करना पड़ता है। तभी मनुष्य एक खुशहाल जिंदगी जी सकता है। एक विपन्न व्यक्ति के धनवान होने की कहानी कुछ ऐसा ही बयां कर रही हैं।

देवरिया जिले के भाटपाररानी क्षेत्र के खामपार निवासी गंगा गुप्ता पहले निहायत गरीब थे। मुश्किल से दो वक्त का भोजन हो पाता था। अब वह सब्जी की खेती कर विकास की सीढ़ी चढ़ रहे हैं। उन्होंने कड़ी मशक्कत कर अपनी तकदीर खुद लिखी है। शुरू में खेत हुंडा पर लेकर सब्जियां उगाई और जब क्षेत्र के विभिन्न बाजारों में बिक्री की तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। धीरे-धीरे बड़े पैमाने पर इसकी खेती शुरू कर दी। अब पूरा परिवार इस धंधे में लगा हुआ है। आज इलाके में गंगा की सब्जी मशहूर है। लोगों को उसकी सब्जी का इंतजार रहता है।

गंगा एक गरीब परिवार में पैदा हुआ। शादी के बाद जब मां-बाप ने दुनिया छोड़ दी तो पूरे परिवार की जिम्मेदारी गंगा के कंधों पर आ गई। पांच बेटों व दो बेटियों की परवरिश की ¨चता सताने लगी। पारंपरिक खेती की लेकिन सफलता नहीं मिली। दिन ब दिन परिवार और भी आर्थिक तंगी की चपेट में आने लगा। ऐसे शुरू की सब्जी की खेती

गंगा ने बताया कि जब आर्थिक विपन्नता आ गई तब मैंने सब्जी की खेती शुरू की। ज्यों सब्जी पैदा होती, उसे ले जाकर बाजार में बेचने लगा। जो भी सब्जी बाजार ले जाता बिक जाती। इसके बाद फिर मैंने इसे थोड़ा और विस्तार दिया। उसके बाद सब्जियों की धड़ल्ले से बिक्री होने लगी। उसके बाद इसको अपना मिशन बना लिया। हुंडा पर खेत लेकर इसकी खेती करने लगा। धीरे-धीरे हमारी पैदा की गई सब्जियां अन्य बाजारों में भी जाने लगी। आय बढ़ी और वह आर्थिक रूप से संपन्न हो गए। अपने बेटे और बेटियों की शादी की, मकान बनवाया और आज जीवन में आर्थिक तंगी का नामोनिशान नहीं है। पूरा परिवार खेती के काम में लगा हुआ है। वर्तमान में लगभग पांच बीघा से अधिक बैगन तैयार हैं जो बाजारों में धूम मचा रहा है। इसके अलावा गोभी, ¨भडी, मिर्च, करेला, आलू आदि की सब्जियां भी गंगा के खेत में दिखाई देती हैं। गंगा बताते हैं कि वर्तमान में बैंगन की खेती से ही 2500 रुपये प्रति दिन की आमदनी हो रही है। इन बाजारों तक पहुंचती है गंगा की सब्जी

गंगा की सब्जी उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि बिहार के अन्य जिलों में भी जाती है। सब्जी की उपलब्धता होने के कारण व्यापारी सीधे खेत तक पहुंचते हैं। सब्जी की बिक्री के लिए इन्हें मेहनत नहीं करनी पड़ती। क्षेत्र में जहां भाटपाररानी, खामपार, बंगरा बाजार, भवानी छापर बाजार, ¨भगारी बाजार व सलेमपुर के अलावा बिहार के मैरवा, माजीपुर, गोपालगंज के बाजारों तक पहुंचती है। वैज्ञानिक विधि से करते हैं सब्जी का संरक्षण

गंगा समय-समय पर कृषि अनुसंधान केंद्र मल्हना के विशेषज्ञों से सलाह लेते रहते हैं और वैज्ञानिक विधि से इनका संरक्षण करते हैं। कीटनाशक के साथ-साथ कंपोस्ट खाद का भी प्रयोग करते हैं।

Posted By: Jagran