बस्ती : प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना(आयुष्मान भारत) के छूटे हुए लाभार्थियों का आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सोमवार से सभी ब्लाकों में गांव-गांव में कैंप लगाए जाएंगे। कैंप में लाभार्थी परिवारों का आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए पंजीकरण कराया जा रहा है। अब तक 900 लाभार्थियों का पंजीकरण हो चुका है।

नौ अगस्त तक चलने वाले इस विशेष पखवाड़े में उन परिवारों का आयुष्मान कार्ड बनाया जाना है, जो अभी तक कार्ड से वंचित हैं। जिला मुख्यालय पर बीते दिनों जागरूकता रैली का भी आयोजन किया गया, जिसमें लोगों को आयुष्मान भारत योजना के प्रति जागरूक किया गया। सहज जनसेवा केंद्र (सीएससी) के जिला प्रबंधक राहुल सिंह व सौरभ गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा पखवाड़े के मद्देनजर कैम्प के आयोजन के लिए माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। इसी के तहत एक दिन में लगभग 56 कैंप का आयोजन किया जा रहा है। जो भी लाभार्थी पहचान पत्र व राशनकार्ड लेकर पहुंच रहे हैं, उनका पंजीकरण कराया जा रहा है। पंजीकरण के बाद आयुष्मान कार्ड जारी किया जाएगा। ज्यादा से ज्यादा लाभार्थी अपना कार्ड बनवा लें, इसके लिए जागरूकता का भी कार्यक्रम चलाया जा रहा है। नोडल अधिकारी व एसीएमओ डा. सीएल कन्नौजिया ने बताया कि जिले में 69433 लाभार्थी परिवार ऐसे हैं, जिनके यहां कम से कम एक सदस्य के पास आयुष्मान कार्ड है। 56 प्रतिशत ऐसे परिवार हैं, जिनके किसी भी सदस्य के पास कार्ड नहीं है। यह एक बड़ी संख्या है। इस बार के अभियान में ऐसे परिवार को फोकस करने को कहा गया है। ग्राम प्रधान और आशा के सहयोग से लाभार्थी को कैम्प लगाए जाने की सूचना पहले से ही दी जा रही है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना की जिला समन्वयक डा. स्वाति त्रिपाठी, डीजीएम अजय मिश्रा, जिला सूचना मैनेजर महेंद्र गुप्ता द्वारा कैंप की मानिटरिग की जा रही है। जनपद में लाभार्थियों की संख्या 1.59 लाख

जनपद में लाभार्थियों की संख्या 1.59 लाख है। इसमें से 1.56 लाख लोगों का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। कार्ड धारक परिवार एक साल में पांच लाख रुपये तक का निश्शुल्क इलाज किसी भी अनुबंधित अस्पताल में करा सकते हैं। दिव्यांग के घर जाकर किया पंजीकरण

बहादुरपुर ब्लाक के बहादुरपुर कस्बे में एक दिव्यांग लाभार्थी का आयुष्मान कार्ड बनाने के लिए सीएससी का विलेज लेवल इंटरप्रेन्योर (वीएलई) उनके घर पहुंचा। दिव्यांग लाभार्थी चंद्रावती पत्नी कपिलदेव कैम्प तक नहीं पहुंच पा रही थी। वीएलई ने उनके घर पहुंचकर उनकी पहचान कराई। मशीन पर अंगूठे का निशान लिया तथा पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की।

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