बस्ती: पुरानी बस्ती थानाक्षेत्र के पांडेय बाजार के हरी प्रसाद को जमीन देने के नाम पर विश्वनाथ जायसवाल ने छह लाख छह हजार रुपये हड़प लिए। हरी प्रसाद को मुकदमा दर्ज कराने के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ी। मुकदमा दर्ज हुआ तो अब विवेचना के लिए थाने का चक्कर लगा रहे हैं। 30 दिन पहले दर्ज इस मुकदमे की विवेचना शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे तमाम पीड़ित हैं, जो न्याय के लिए थाने से लेकर पुलिस कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। जिले में कुल 556 विवेचनाएं लंबित हैं। इनमें छह माह से अधिक व वर्ष भर से कम समय की 37 विवेचनाएं शामिल हैं।

पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाने की सरकार की मंशा को जिम्मेदार अफसर ही पलीता लगा रहे हैं।

मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचनाओं का शीघ्र निस्तारण न होने से लोगों का पुलिस से भरोसा उठने लगता है। पुलिस अधिकारियों के यहां चक्कर लगाकर पीड़ित थक जाते हैं। ऐसी स्थिति न आए, इसके लिए समयबद्ध विवेचना की व्यवस्था पर कड़ाई से अमल किए जाने की जरूरत है। पिछले दिनों एडीजी जोन ने सभी पुलिस कप्तानों को जिले में लंबे समय से लंबित विवेचनाओं की सूची तैयार करने और प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण कराने का निर्देश दिया था।

मैनपुरी के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक से जिलों में विवेचना की रिपोर्ट तलब की है। हाईकोर्ट के इस कदम के बाद पुलिस विभाग में लंबित विवेचनाओं को शीघ्र निस्तारित करने की कवायद तेज हो गई है।

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विवेचकों को दिया गया है निस्तारित करने का निर्देश: एसपी एसपी आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में 556 विवेचनाएं लंबित हैं। इनमें बस्ती सदर सर्किल के थानों में 131, हर्रैया सर्किल में 177, कलवारी सर्किल में 137 व रुधौली सर्किल के थानों में 111 लंबित विवेचनाएं शामिल हैं। लंबित विवेचनाओं की हर महीने समीक्षा की जाती है। सितंबर में सर्किलवार थानों के विवेचकों की बैठक कर लंबित विवेचनाओं की जानकारी ली गई है। लापरवाह विवेचकों को सख्त चेतावनी भी दी गई है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि वह समय से विवेचनाओं का निस्तारण करें, जिससे लोगों को न्याय मिल सके।

Edited By: Jagran