गोरखपुर, जेएनएन। सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज तहसील कार्यालय स्थित भूलेख अभिलेखागार बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। जहां अभिलेखों का पूरा खजाना रखा जाता है। ऐसी सुरक्षित जगह पर रखे गए थे, 41 सरकारी लैपटाप। यहां से 39 लैपटाप चोरी हो गए। इससे पूरा तहसील प्रशासन हिल गया है। यही नहीं यहां की सुरक्षा व्यवस्था किस तरह पुख्ता रहती है, घटना ने इसकी भी कलई खोल दी है। सवाल ये उठता है, तो ऐसे सुरक्षित स्थान से अगर लैपटाप चोरी हो सकते हैं, तो महत्वपूर्ण अभिलेख यदि गायब हो जाएं, तो क्या भरोसा। कुछ भी कहीं न कहीं घटना ने प्रशासनिक चूक को भी उजागिर कर दिया है।

छात्रों में वितरित करने के लिए रखे गए थे लैपटाप

पिछली सरकार में लैपटाप छात्रों में बंटने के लिए आए थे। किन्हीं कारण वश 41 लैपटाप नहीं बंट सके। मार्च 2014 में सभी लैपटाप को सुरक्षित अभिलेखागार में रखा गया। जिसकी चाभी रजिस्ट्रार कानून के पास होती थी। तहसील में कार्य अधिक होने के कारण राजस्व परिषद की व्यवस्था के तहत एक संविदा कर्मी की तैनाती है। खतौनी फी¨डग का काम अधिक हुआ, तो सहयोगी के रूप में श्याम सुंदर निवासी ग्राम भदाह थाना खलीलाबाद जनपद संतकबीर नगर को भी रखा गया। करीब वर्ष 2009 में प्राइवेट कर्मी के रूप में इससे कम्प्यूटर आपरेटर के रूप में कार्य लिया जा रहा था। पता नहीं किन वजहों ने इसने अधिकारियों का विश्वास ऐसा जीता, कि रिकार्ड रूम की चाभी इसी के पास रहने लगी। धीरे-धीरे एक-एक करके लैपटाप गायब होते गए और प्रशासनिक अमले को भनक तक नहीं लगी। पता तब लगा, जब तहसीलदार अभिलेखागार का निरीक्षण कर रहे थे, इतने सुरक्षित स्थान के बाद भी 41 में 39 लैपटाप का गायब होना, पूरे प्रशासनिक अमले को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

घटना का पर्दाफाश करने के करीब पहुंची पुलिस

लैपटाप चोरी की घटना के बाद पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। नामजद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। ऐसे लोगों तक भी पुलिस पहुंची, जिन्होंने चोरी के लैपटाप खरीद थे, कुछ लैपटाप पुलिस के हाथ भी आ चुके हैं। जल्द ही घटना का पर्दाफाश करने के करीब पुलिस पहुंची दिखाई दे रही है। इंस्पेक्टर प्रदीप ¨सह ने कहा कि पूछताछ व दबिश जारी है, शीघ्र बेहतर परिणाम सामने आएंगे।

Posted By: Jagran

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