गोरखपुर, जेएनएन। हर में पुलिस बूथ को लेकर नगर निगम और यातायात पुलिस में रार बढऩे लगी है। नगर निगम ने लोहे के पुलिस बूथ को अवैध घोषित कर दिया है तो वहीं यातायात विभाग ने नए वाहनों का पंजीकरण न होने पर नगर निगम प्रशासन से जवाब मांगा है। हालांकि अवैध घोषित करने के बाद भी नगर निगम प्रशासन बूथों को हटवा नहीं पा रहा है।

ये है मामला

यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने और पुलिसकर्मियों की सुविधा के लिए पुलिस अधीक्षक यातायात ने पिछले साल शहर के 24 स्थानों पर बूथ लगाने की अनुमति मांगी थी। मेसर्स ज्योति फ्लैक्स को लोहे के बूथ लगाने की जिम्मेदारी दी गई थी। नगर निगम ने अनुमति के साथ निर्देश दिए थे कि पुलिस बूथ पर सरकार की योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया जाएगा, लेकिन फर्म ने पुलिस बूथों पर लोहे का स्ट्रक्चर लगाकर अपनी प्रचार सामग्री लगा दी।

10 हजार रुपये प्रतिमाह लगा है अर्थदंड

नगर निगम  ने 10 अक्टूबर 2019 को पुलिस बूथ लगाने की अनुमति दी थी। प्रचार सामग्री लगाने पर अर्थदंड नवंबर 2019 से लगाया गया है। प्रति बूथ एक महीने का अर्थदंड 10 हजार लगाया गया है। नवंबर से जनवरी तक तीन महीने का 24 बूथों पर कुल अर्थदंड 7.20 लाख रुपये हो गया है।

यातायात विभाग ने नगर निगम को लिखा पत्र

एक तरफ नगर निगम पुलिस बूथ हटाने की 20 दिनों से योजना बना रहा है तो दूसरी तरफ यातायात विभाग ने बिना पंजीकरण वाहन चलाने पर नगर निगम प्रशासन को घेरना शुरू कर दिया है। यातायात विभाग ने एक व्यक्ति की शिकायत पर नगर निगम से बिना पंजीकरण चल रहे वाहनों के बारे में जवाब मांगा है। साथ ही ड्राइवरों को लाइसेंस के साथ चलने को कहा है।

चल रही प्रक्रिया

अपर नगर आयुक्‍त अनिल कुमार सिंह का कहना है कि नगर आयुक्त ने पुलिस बूथ लगाने की अनुमति निरस्त कर दी है। यातायात विभाग ने वाहनों के पंजीकरण को लेकर पत्र भेजा है। पंजीकरण के लिए आरटीओ में प्रक्रिया चल रही है।

विज्ञापन का मसला पुलिस का नहीं

इस संबंध में एसपी ट्रैफिक आदित्‍य प्रकाश वर्मा का कहना है कि बूथ पर विज्ञापन लगाने का मामला फर्म और नगर निगम के बीच का है। यदि नगर निगम बूथ हटाना चाहता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। बिना पंजीकरण वाहन चलाने पर नगर निगम को पत्र लिखा गया है। 

Posted By: Satish Shukla

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस