गोरखपुर, जागरण संवाददाता। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवकों व महिलाओं से लाखों की ठगी हुई है। नंदानगर में रहने वाली महिला ने 50 लोगों के 19.32 लाख रुपये हड़प लिया है। जालसाजी कर रुपये हड़पने का केस दर्ज कर खोराबार पुलिस जांच कर रही है।

यह है मामला

खोराबार के नदुआ छावनी निवासी सरिता ने पुलिस को दी तहरी में लिखा है कि बेलीपार के महाबीर छपरा निवासी रेखा व खोराबार के फुरसतपुर निवासी रमावती ने उसे बताया कि नंदानगर दरगहिया निवासी मीरा पत्नी सुनील कुमार एम्स में सफाई कर्मी, वार्ड ब्वाय, कंप्यूटर आपरेटर व कैशियर की नौकरी दिलवा रही है। जिसके बाद रेखा व रमावती के साथ वह दो जुलाई को एम्स के बाहर नौकरी दिलवाने वाली मीरा से मिली। सरिता के साथ खोराबार के बड़गो निवासी मंजू गौड़ और बेलीपार के महाबीर छपरा निवासी राधिका गौड़ भी थीं।मीरा ने उन्हें बताया कि वह एम्स में नौकरी करती है और वहां के दो अधिकारियों से अच्छे संबंध हैं।जिनसे बात करके योग्यता के अनुसार संविदा पर नौकरी लगवा देगी।जिसके लिए एक लाख से लेकर डेढ़ लाख रूपये लगेंगे।

इन लोगों के साथ हुई ठगी

दर्ज मुकदमें के अनुसार सरिता ने अपना व 11 अन्य लोगों का 1.47 लाख खाते में और 2.90 लाख नगद दिया। इसी प्रकार मंजू गौड़ ने अपना व सात अन्य लोगों के 4.05 लाख, राधिका गौड़ ने अपना व आठ अन्य लोगों के 2.70 लाख, मंजू शर्मा ने अपना व 12 अन्य लोगों के 4.20 लाख, लाल मोहम्मद ने अपना व अपने भाई महबूब अली के तीन लाख, बैजनाथ, मेनका, विमला, लक्ष्मण और अमन ने 20-20 हजार रूपये दिए। मीरा ने 16 नवंबर 2021 तक नौकरी दिलाने का वादा किया था।लेकिन किसी को नौकरी नहीं मिली।जिसके बाद सरिता ने मुख्यमंत्री के कैंप कार्यालय व सीओ कैंट को प्रार्थना पत्र दिया। जिसके आधार खोराबार पुलिस ने मीरा के खिलाफ केस दर्ज किया।

मीरा नाम की कोई महिला एम्स की कर्मचारी नहीं है। एम्स में योग्यता के आधार पर नियुक्ति की जाती है। यदि कोई रुपये लेकर एम्स में नौकरी दिलाने का झांसा देता है तो उस पर विश्वास न करें। किसी को नौकरी को लिए रुपये न दें। - डा. सुरेखा किशोर, कार्यकारी निदेशक एम्स।

Edited By: Pradeep Srivastava