गोरखपुर, जेएनएन। भारत सरकार से अनुमति मिलने के बाद वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर लॉकडाउन के चलते कुशीनगर में रुके 134 विदेशी नागरिकों के स्वदेश वापसी का रास्ता साफ हो गया है। इनमें एक रूसी महिला पर्यटक व 133 थाईलैंड के नागरिक शामिल हैं। गुरुवार को थाई नागरिक बोधगया के लिए व रूसी पर्यटक ऋषिकेश के लिए सड़क मार्ग से रवाना हुए। इससे पूर्व इन विदेशी नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जिसमें सभी स्वस्थ पाए गए।

बिहार से 21 फरवरी की रात आए थे बौद्ध भिक्षु

बौद्ध परिपथ का पैदल भ्रमण करने के क्रम में थाई बौद्ध भिक्षु बिहार सीमा से 21 फरवरी की रात कुशीनगर आए थे और थाई मंदिर के पीछे मैदान में रह रहे थे। इनमें भिक्षु-भिक्षुणी व कुछ गृहस्थ भी शामिल हैं। दूसरी ओर रूसी साधिका एकातेरिना 16 मार्च को साधना के लिए यहां आई थीं। लॉकडाउन के कारण वह स्वदेश नहीं लौट सकीं। इन्हें विदा करने के पूर्व डॉ. बीएन सिंह, डॉ. मैनेजर यादव, डॉ. एसके सिंह व फिजियोथेरेपिस्ट विरेंद्र शर्मा की टीम ने सभी विदेशी पर्यटकों का थर्मल स्कैनिंग किया।

थाई व रूसी दूतावासों ने भारत सरकार से किया था अनुरोध

थाई व रूसी दूतावास ने भारत के विभिन्न शहरों में फंसे अपने नागरिकों को स्वदेश भेजने में मदद के लिए भारत सरकार से अनुरोध किया था। केंद्र सरकार से सहमति मिलने के बाद विदेशी पर्यटक रवाना हुए। थाई नागरिक शुक्रवार को बोधगया से विशेष फ्लाइट से रवाना होंगे। जबकि रूसी पर्यटक ऋषिकेश में मौजूद अपने देश के अन्य नागरिकों के साथ स्वदेश जाएंगी। उपजिलाधिकारी देश दीपक सिंह के अनुसार शासन से अनुमति मिलने के बाद थाई व रूसी पर्यटकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उन्हें गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है।

रायबरेली से सोनौली पैदल पहुंचे छह नेपाली नागरिक

रायबरेली से पैदल चले छह नेपाली नागरिक गुरुवार को भारत-नेपाल की सोनौली बार्डर पर पहुंचे। पुलिस ने उन्हें सोनौली स्थित एक विद्यालय में बने क्वारंटाइन सेंटर में रखा है। पड़ोसी मुल्क नेपाल के श्यांग्‍जा निवासी भूपराज पौडेल, समर, रेशम, लाल बहादुर, राजू व सुनील अधिकारी भारत के रायबरेली में एक कृषि कंपनी में काम करते हैं। नेपाली नागरिकों ने बताया कि लॉकडाउन लागू होने के बाद कंपनी में काम बंद हो गया। 14 अप्रैल को लॉकडाउन खुलने के इंतजार में 21 दिन किसी तरह बिताया। जब 19 दिन के लिए लॉकडाउन दोबारा बढ़ गया तो घर जाने का मन बना लिए। पैदल यात्रा शुरू कर दी। जहां रास्ते में कुछ लोगों ने भोजन भी कराया। इस बीच काफी दिक्कतों से होकर सोनौली बार्डर तक पहुंचे हैं। भारत-नेपाल सीमा सील होने के कारण उन्हें नेपाल जाने की अनुमति नहीं मिली। सोनौली चौकी प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि छह नेपाली नागरिकों को सोनौली स्थित सुभाष चंद्र बोस स्कूल में क्वारंटाइन कराया गया है। सीमा खुलने के बाद उन्हें नेपाल भेज दिया जाएगा। 

Posted By: Satish Shukla

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