जागरण संवाददाता, गोरखपुर :

सशस्त्र सीमा बल के ट्रेनिंग सेंटर के लेक व्यू हाल में आयोजित स्पो‌र्ट्स एंजरी कैंप में जवानों को चोट लगने पर सावधानी व इलाज के बारे में जानकारी दी गई। बीआरडी मेडिकल कालेज के आर्थोसर्जन डा. इमरान अख्तर ने कहा कि यदि घुटने में चोट के बाद लचक आने लगे तो यह घुटने की रस्सी के टूटने का लक्षण है। इससे तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान जवानों को तरह-तरह की चोटें आती हैं। इसमें मुख्य रूप से स्ट्रेस फ्रैक्चर, घुटने की रस्सी का टूटना, मोच लगना या जोड़ों के सरकने की समस्या प्रमुख है।

स्ट्रेज फ्रैक्चर में पैर की हड्डियों में दरारें पड़ जाती हैं जिसका मुख्य लक्षण पैर के अगले हिस्से में दर्द है। स्ट्रेस फ्रैक्चर से बचने के लिए जवानों को सही जूतों का प्रयोग करना चाहिए। पक्की सड़क पर नहीं दौड़ना चाहिए, समतल सतह पर दौड़ना चाहिए और शरीर में पानी की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए। शरीर में कपड़े व मोजे पसीना सोखने वाला होना चाहिए। कैल्शियम व विटामिन डी का सेवन करना चाहिए।

यदि दौड़ते समय पैर में तीव्र दर्द होने लगे, जो आराम करने पर भी ठीक न हो, चक्कर अनिद्रा आने लगे तो दौड़ना बंद कर देना चाहिए। स्ट्रेस फैक्चर होने पर तीन हफ्ते तक पांव पर वजन नहीं रखना चाहिए।

यदि घुटने की रस्सी खेल के दौरान आए दिन टूट जाती है और आपरेशन की आवश्यकता पड़ती है तो इसका इलाज दूरबीन विधि से सर्जरी आर्थोस्कोपी से होता है। यदि घुटने में चोट लगने के बाद लचक आने लगे और सीढ़ी उतरते और दौड़ने में घुटना आगे भागने लगे तो यह घुटने की रस्सी के टूटने का लक्षण है। ऐसे में तत्काल डाक्टर को दिखना चाहिए।

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