गोरखपुर, जेएनएन। नगर निगम में भ्रष्टाचार के सूत्रधार बने पार्षदों-कर्मचारियों के 'कृपापात्र' सफाईकर्मियों पर नगर आयुक्त ने गाज गिराई है। 112 सफाईकर्मियों को नगर निगम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। ये सभी कर्मचारी कुछ पार्षदों व कुछ कर्मचारियों के रिश्तेदार थे और कागजों में काम कर रहे थे। इनको बाहर करने से नगर निगम को प्रति माह 10 लाख रुपये से ज्यादा की बचत होगी। काम न करने वाले सफाईकर्मियों की संख्या अभी और बढ़ेगी।

लंबे समय से चल रहा था खेल

नगर निगम में बिना काम किए हाजिरी प्रमाणित कर भुगतान का खेल लंबे समय से चल रहा है। नगर आयुक्त ने इस खेल को पकड़ा तो सभी चार जोन में काम न करने वाले आउटसोर्सिंग के सफाईकर्मियों का डाटा इकट्ठा किया गया। शनिवार को पूरे दिन चली कवायद में 112 सफाईकर्मियों को चिह्नित किया गया। एक सफाईकर्मी को प्रति माह तकरीबन नौ हजार रुपये मानदेय दिए जाते हैं।

ऐसे खुला मामला

नगर आयुक्त अंजनी कुमार सिंह को काफी समय से शिकायत मिल रही थी कि एक पार्षद के रिश्तेदार सफाईकर्मी हैं लेकिन काम नहीं करते। पार्षद और कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से इनकी उपस्थिति की सूचना नगर निगम में दी जाती है और मानदेय का भुगतान कराया जाता है। नगर आयुक्त ने शुक्रवार शाम एक सुपरवाइजर को पकड़ तो पता चला कि सपा से जुड़े एक हिस्ट्रीशीटर पार्षद के कुछ रिश्तेदार सफाईकर्मी के रूप में पंजीकृत हैं लेकिन काम नहीं करते। इसके बाद नगर आयुक्त ने सभी जोनल अफसरों को निर्देश दिए कि वह सुपरवाइजरों की बैठक बुलाएं और काम न करने वाले सफाईकर्मियों की सूची लेकर उन्हें बाहर करें।

नगर निगम में ऐसे सफाईकर्मी चिह्नित किए गए हैं जो बिना काम मानदेय ले रहे थे। अब भी बड़ी संख्या में बिना काम मानदेय लेने वाले सफाईकर्मी हैं। जांच की प्रक्रिया लगातार चलती रहेगी। - सीताराम जायसवाल, महापौर

Posted By: Pradeep Srivastava

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