डॉ. राकेश राय, गोरखपुर

राष्ट्रभक्ति के लिहाज से 19 जुलाई 2018 की तारीख शहर ही नहीं समूचे पूर्वाचल के लिए खास थी। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के गेट पर 111 फीट की ऊंचाई पर 50 वर्ग फीट के तिरंगे की डोर जैसे ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खींची, तिरंगा लहराने लगा और इसी के साथ शहर के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। अब तो यह तिरंगा शहर की आन, बान, शान और सम्मान के साथ पहचान भी बन गया है। विश्वविद्यालय के सामने से गुजरने वाले हर व्यक्ति के सिर का तिरंगे के सामने खुद-ब-खुद झुक जाना इस सम्मान और पहचान की गवाही है।

शहर की इस नई पहचान को स्थापित करने का का श्रेय जाता है जेसीआइ मिडटाउन की उस उत्साही टीम को, जिन्होंने अपने संकल्प को बखूबी धरातल पर उतार दिया। 111 फीट के झंडे को गोरखपुर स्थापित करने का विचार मिडटाउन के पदाधिकारियों को कैसे आया, इसकी भी प्रेरणादायी कहानी है। दरअसल दो साल पहले कुछ जेसीआइ सदस्य नई दिल्ली गए और किसी कार्य से उनका कनाट प्लेस जाना हुआ। कनाट प्लेस पर उन्हें वह विशाल तिरंगा फहराता दिखाई दिया, जो कनाट प्लेस ही नहीं बल्कि समूचे दिल्ली की पहचान है। तिरंगे को देख उनके मन में आया कि क्यों न ऐसा ही तिरंगा गोरखपुर में भी फहरे और वह भी शहर ही नहीं पूर्वाचल की एक पहचान बने। गोरखपुर लौटने पर उन्होंने इसके लिए प्रयास शुरू कर दिया। प्रयास धीरे-धीरे कब संकल्प बन गया, उन्हें खुद भी पता नहीं चला। संकल्प को जमीं पर उतारने के लिए उन्हें ऐसी जमीन की तलाश थी, जो तिरंगे के सम्मान के अनुरूप हो। विभिन्न स्थानों का सर्वे करने के बाद जेसीआइ टीम ने गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर को इसके लिए सर्वाधिक उपयुक्त पाया। विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने जब प्रस्ताव रखा गया तो कुलपति प्रो. वीके सिंह ने इसे हाथोंहाथ लिया था। पैराशूट के कपड़े से बना है तिरंगा

तिरंगे के निर्माण में जेसीआइ टीम ने गुणवत्ता को लेकर कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा। पैराशूट के कपड़े का तिरंगा तैयार कराया गया। जेसीआइ के जनसंपर्क अधिकारी नवीन पालड़ीवाल ने बताया कि 30 फीट लंबे और 20 फीट चौड़े तिरंगे को 111 फीट ऊंचे पोल के साथ तैयार कराने में कुल छह महीने का वक्त लगा। निर्माण में 10 लाख रुपये से अधिक की लागत आई। नवीन ने बताया कि मानक और गुणवत्ता को लेकर किसी तरह का कोई सवाल न उठे, इसके लिए तिरंगे का निर्माण कार्य गाजियाबाद की उस कंपनी से कराया गया, जिसे इस तरह के तिरंगे के निर्माण का लंबा अनुभव था। विश्ववविद्यालय ने ली है रख-रखाव की जिम्मेदारी

जेसीआइ टीम ने तिरंगे को स्थापित तो करा दिया लेकिन चूंकि वह विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित है, इसलिए उसके रख-रखाव की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन ने खुद अपने हाथों में ली है। जैसे ही झंडा या उसके खंभे में किसी तरह की दिक्कत आएगी, विश्वविद्यालय द्वारा उस दिक्कत को तत्काल दूर कराया जाएगा।

Posted By: Jagran