यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
समाज निर्माण में भाषा की भूमिका अहम

जागरण संवाददाता, गोरखपुर : समाज निर्माण में भाषा की भूमिका अहम होती है। संस्कृति से अलग होकर आदमी जमूरा बन जाता है।
यह बातें डा. जनार्दन ने कही। वह भोजपुरी संगम द्वारा आयोजित 48वीं 'बइठकी' में बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष सूर्यदेव पाठक 'पराग' की कहानी 'प्रश्नचिह्न' पर चर्चा हुई। डा. जनार्दन ने कहा कि पराग की भोजपुरी बहुत समर्थ है किन्तु कहानी में आदर्शवाद गुजरे जमाने की बात हो गई है। किसी पद विशेष से आदमी छोटा या बड़ा नहीं होता बल्कि अपने कार्य से होता है। विद्यापीठ से आए प्रो. आरपी द्विवेदी ने कहा कि भोजपुरी के लिए हम सबको मिलकर कुछ करने की आवश्यकता है। डा. आद्या प्रसाद द्विवेदी ने कहा कि शीर्षक कहानी का सबल पक्ष है। श्रीधर मिश्र, डा. विमलेश मिश्र, सोमनाथ ओझा, सत्यनारायण मिश्र, चंदेश्वर, आरडीएन श्रीवास्तव, हरिवंश शुक्ल, सूर्यदेव पाठक 'पराग' व भीम प्रसाद प्रजापति ने काव्य पाठ किया। संचालन व धन्यवाद ज्ञापन सत्यनारायण मिश्र ने किया। नरसिंह बहादुर चंद, रवींद्र मोहन त्रिपाठी, केशव पाठक, राकेश राय, कुलेंद्र राय व नवनीत आदि उपस्थित थे।
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