गोंडा: कसमें वादे प्यार वफा सब, बाते हैं बातों का क्या.. यह गीत इन दिनों गोंडावासियों की जुबां पर है। चुनाव का जिक्र होते ही वह पुरानी यादों में खो जाते हैं। शहर की गलियों से लेकर मुहल्लों तक में जल निकासी एक बड़ी समस्या है। रास्तों पर गंदा पानी भरा है। इससे होकर लोगों को आना जाना पड़ रहा है। हर चुनाव में सीवर लाइन का मुद्दा खूब उछलता है। बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, बाद में सब कुछ फाइलों में कैद हो जाता है। ऐसे में शहरियों की मुश्किलें जस की तस बनी हुई है। पेश है नंदलाल तिवारी की रिपोर्ट

गोंडा नगर में कुल 27 वार्ड है। यहां पर दो लाख से अधिक की आबादी रह रही है। शहर की सबसे बड़ी समस्या सीवर लाइन है। सड़कें ऊंची हो गईं, लेकिन नालियां नीची हैं। इससे घरों से निकलने वाला गंदे पानी के लिए कोई रास्ता नहीं है। वर्ष 2012 में सीवर लाइन का प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इसे स्वी़कृति के लिए भेजा गया, लेकिन अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिल पाई। यही नहीं, शहर ही नहीं है बल्कि जिले के धानेपुर, इटियाथोक सहित अन्य कस्बों में भी जल निकासी की समस्या है। जनता इससे परेशान है, लेकिन माननीय बेफिक्र।

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घट गए नाले

- सिविल लाइंस हो या विष्णुपुरी कालोनी हर मुहल्ले में जल निकासी एक बड़ी समस्या है। पहले नगर में छोटे-बड़े 38 नाले थे। इसमें से 20 का अस्तित्व समाप्त हो गया है। अब महज 18 नाले ही बचे हैं। ऐसे में मामूली सी बारिश में ही कई मुहल्ले जलमग्न हो जाते हैं। --------

यह था प्रोजेक्ट

-वर्ष 2012 में 332 करोड़ रुपये की लागत वाले सीवर लाइन का प्रोजेक्ट बना था। तत्कालीन डीएम डा. रोशन जैकब के निर्देशन में बनाए गए प्रोजेक्ट में 25 मिलियन लीटर प्रतिदिन की क्षमता का ट्रीटमेंट प्लांट, 232.69 किलोमीटर की सीवरेज लाइन, एक अदद इंटरमीडिएट पंपिग स्टेशन, 325 मीटर की राइजिग मेंस के अतिरिक्त पंपिग प्लांट,पावर कनेक्शन शामिल था। इसके लिए अलग से पांच करोड़ रुपये की जमीन का प्रस्ताव भी था। यह प्रस्ताव राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजा गया था। ---------------------

पब्लिक बोल

- डा. अभय श्रीवास्तव का कहना है कि नगर में सीवर लाइन का निर्माण आवश्यक है ताकि जल निकासी की समस्या का निराकरण हो सके। प्रत्यूष राज का कहना है कि मामूली सी बारिश में ही जगह-जगह जलभराव की मुश्किल हो जाती है, ऐसे में सीवर लाइन का निर्माण जरूरी है। ममता शर्मा का कहना है कि सीवर लाइन को लेकर मजबूत प्रयास किए जाने चाहिए। निशा का कहना है कि नेताओं को इसके लिए पहल करनी चाहिए।

Edited By: Jagran