जासं, गोंडा : कोविड संक्रमण के कारण न सिर्फ इस बार चुनावी ²श्य बदला हुआ नजर आ रहा है बल्कि, चुनाव प्रचार के तौर-तरीके भी बदल गए हैं। कोविड की रोकथाम के लिए भारत निर्वाचन आयोग की रैली, जुलूस, सभा व पदयात्रा पर रोक ने दावेदारों की टेंशन बढ़ा दी है। जिले में पांचवें चरण में होने वाले विधानसभा चुनाव में अब सिर्फ डेढ़ माह ही रह गए हैं, इसके बावजूद सड़कों पर सियासी शोर सुनाई नहीं दे रहा है। एक तरफ टिकट की टेंशन तो दूसरी तरफ टिकट यदि मिल गया तो लोगों तक कम समय में कैसे पहुंचेंगे, इसको लेकर संभावित दावेदारों की धड़कन बढ़ी हुई है। टिकट मिलने को लेकर आश्वस्त दावेदार गांवों में डोर टू डोर संपर्क जोर दे रहे हैं। एक या दो वाहन से ही वह गांव में जनसंपर्क करने को मजबूर हैं। सुबह की चाय हो या फिर शाम का डिनर, इन दिनों में गांव में ही करना पड़ता है।

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कोई जताता आभार तो कर रहा सवाल

- सत्ताधारी दल के एक दावेदार जब क्षेत्र में पहुंचे तो एक समर्थक ने योजना का लाभ मिलने पर आभार जताया। चर्चा आगे बढ़ी तो दूसरे व्यक्ति ने सवाल किया नेता जी, अच्छी नौकरी मिली है। रातभर खेत में रखवाली करना पड़ रहा है। ये सुनकर नेताजी सकपका गए और कहने लगे, इसलिए तो मुफ्त राशन दे रहे हैं।

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जनता में गिना रहे उपलब्धियां

- चुनाव को लेकर क्षेत्र में सबसे ज्यादा भाजपा व सपा के दावेदारों की दस्तक दिखाई दे रही है। कोई मुफ्त राशन तो कोई विकास के दावे कर रहा है। आने वाले दिनों में रोजगार के संग मुफ्त बिजली का वादे ने सियासी सरगर्मी तेज कर दी है। दावेदार गांव के हर घर तक पहुंचकर अपनी सरकार में योजनाओं का लाभ मिलने लेने वाले व्यक्ति से जरूर मिलते हैं।

Edited By: Jagran