गोंडा : प्रदेश सरकार सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए अभियान चला रही। हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट तक सड़कों पर गड्ढों के कारण बढ़ रहे सड़क हादसों को लेकर गंभीर हैं। इसके बावजूद जिले की प्रमुख सड़कें ही ध्वस्त और जर्जर हैं। गड्ढा मुक्त अभियान की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2017-18 में दो करोड़ 35 लाख रुपये खर्च हो चुके। वर्तमान समय में भी कहीं-कहीं पैबंद लगाकर सड़कों के जख्म को भरने की कवायद चल रही। हालांकि इससे राहगीरों को राहत मिलती नहीं दिख रही। कारण हाईवे और प्रांतीय मार्ग के अलावा शहर की सड़कें भी पूरी तरह छलनी हैं। दैनिक जागरण टीम ने सोमवार को चार प्रमुख सड़कों का जायजा लिया तो कागजी दावों से इतर स्याह तस्वीर नजर आयी-पेश है खास रिपोर्ट-

जागरण टीम, गोंडा : दृश्य एक-सुबह के ठीक दस बज रहे हैं। वजीरगंज कस्बे में रोजाना लगने वाली सब्जी मंडी आबाद है। मंडी से सब्जी लादने जा रहे ठेला चालक दिनेश जायसवाल को पेट्रोल पंप के निकट ठेला चलाने में खासा जोर लगाना पड़ा रहा है। गड्ढे में वाहन न जाएं, इस कारण वाहनों को चालक बिल्कुल किनारे से निकाल रहे हैं। इसके लिए रांग-राइट का भी भान नहीं। दयाराम बोले कि अभी दस दिन पहले यहीं पर बाइक सवार ने साइकिल में टक्कर मार दी, जिससे साइकिल चला रहे राजाराम का पैर टूट गया। दुकानदार मुस्ताक, सुनील और रामअधार बोले साहब चाहे जेहकय सरकार आए जाय, इ सड़क अइसन ही रहत।

दृश्य-दो: 10.05 बजे। स्थान : झंझरी ब्लॉक के सामने। सर्द मौसम में धूप की दस्तक के बीच आने-जाने वाले लोगों का सिलसिला जारी था। गड्ढायुक्त सड़क पर गिट्टियां बिखरी हैं और धूल उड़ रही है। जल्दी निकलने के चक्कर में बाइक सवार युवक अचानक गिर गया। कुछ ही पल में उठा और कपड़ा साफ करते हुए निकल लिया। कुछ दूर आगे जाने पर सड़क पर ही एक वैन टूटी हुई खड़ी मिली। बताया गया कि शनिवार की रात वैन गन्ना लदी ट्रॉली में भिड़ गई थी, जिसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। माधवपुर गांव के सामने से वाहनों के निकलते समय इतनी धूल उड़ रही थी कि हर कोई मुंह ढकने की कोशिश करता दिखा। मेवातियान से बेलसर तक 121 गड्ढे मिले।

दृश्य तीन : समय सुबह 10.15 बजे। गोंडा-बहराइच मार्ग पर परिवहन निगम की बस के साथ ही टैक्सी, टेंपो, अन्य व्यावसायिक, हल्के वाहन, मोटर साइकिल, साइकिल सवार व पैदल लोगों ने आवाजाही शुरू हो गई थी, लेकिन मार्ग के गड्ढे उनको निर्धारित गति में नहीं चलने दे रहे थे। मरम्मत कार्य वर्ष 2016-17 में कराया गया था। दो महीने पहले पै¨चग हुई, जिसकी गिट्टियां सड़क पर बिखरी हैं। बहराइच तक जाने वाले यात्रियों को 67 किलोमीटर के लंबे सफर में जख्मी सड़क का झटका झेलने को विवश होना पड़ता है।

दृश्य चार-सुबह के 10.20 बज रहे हैं। गोंडा-जरवल (गोंडा-लखनऊ) मार्ग पर स्थित एक मेडिकल कॉलेज और चौपाल सागर के बीच का नजारा कुछ ऐसा रहा है कि एक तरफ तो कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं की भीड़ रही तो दूसरी तरफ मुख्यालय जाने वालों की संख्या भी कम न थी। संकरी और ऊबड़-खाबड़ इस सड़क पर हिचकोले खाते वाहन रफ्तार नहीं भर पा रहे थे। गोंडा से 46 किलोमीटर लंबे इस सफर को (जरवल तक)पूरा करने में डेढ़ से दो घंटे लग जाते हैं। हर माह औसतन दो से तीन लोगों की मौत हो रही है और कई घायल हो रहे हैं। वर्ष 2004 से गोंडा-जरवल (गोंडा-लखनऊ) मार्ग के चौड़ीकरण का इंतजार आज भी नहीं खत्म हुआ।

(प्रस्तुति: अजय ¨सह के साथ वरुण यादव, धनंजय तिवारी व अजय पांडेय: छायाकार अमित पांडेय)

--------

इतिहास

गोंडा-बहराइच मार्ग।

-लंबाई 67 किमी-

- वर्ष 2016-17 में मरम्मत

- पीडब्ल्यूडी इसकी निगरानी कर रहा है। -गोंडा-अयोध्या मार्ग

लंबाई-60किमी

निर्माण-2008-09

निर्माणकर्ता संस्था-एलएंडटी

वर्तमान में संरक्षण-राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण

-----------

गोंडा-बेलसर मार्ग

-लंबाई 18.1 किलोमीटर।

-निर्माण-30 साल पूर्व

-चौड़ीकरण-5किमी-2012

-वर्तमान संरक्षण-लोनिवि

------------

गोंडा-जरवल मार्ग

लंबाई-46किमी

फोरलेन निर्माण शुरू-2016

अबतक पूरा नहीं

बजट की दरकार

अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग जीतेंद्र कुमार ने बताया कि गोंडा-अयोध्या मार्ग एनएचएआइ के अधीन है। जरवल रोड के लिए 75 करोड़ रुपये की जो किस्त मिली है उससे निर्माण कराया जा रहा है। पूरी सड़क निर्माण के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की जरूरत है।

- सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. सर्वेश गौतम का कहना है कि सड़क में गड्ढे दुर्घटना का एक कारण हैं। अक्सर गड्ढे से बचने के लिए चालक अपनी साइड छोड़ देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं होती हैं। ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। लोक निर्माण विभाग को चिह्नित स्थलों पर संकेतांक लगाने के लिए कहा गया है ताकि एक्सीडेंट को कम किया जा सके।

समय से पहले कंडम हो जाती हैं बसें

यहां सड़क में गड्ढे बहुत हैं। इससे डिपो को मिलने वाली नई बसें समय से पहले ही कंडम हो जाती हैं। बस के शीशे आदि टूट जाते हैं। कई बार बसें रास्ते में ही खराब हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। दुर्घटनाएं भी हो जाती हैं।

-वीरेंद्र कुमार वर्मा, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परिवहन निगम

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस