पेटवा गड़गड़ात हय.. पेटवा मरोड़त हय.. जिवा घबरात हय, गोंडा में यह सुनकर अवधी भाषा की मुरीद हो गईं साउथ इंडिया की महिला डॉक्टर
Women Doctor Avadhi: 22 वर्षों से गोंडा में चिकित्सा सेवाएं दे रहीं डॉ. अनीता के लिए शुरुआत में अवधी बोली को समझना आसान नहीं था।
HighLights
गोंडा में साउथ की महिला डॉक्टर ने बताया कि अवधी में कैसे बीमारी बताते हैं मरीज
सोशल मीडिया पर छा गया महिला डॉक्टर अनिता मिश्रा का वायरल वीडियो
मरीज बोलते हैं, हथवा झनझनात है, कनवा कुकुआत है, जियरा घबरात है
विवाह के बाद ही हिंदी भाषा धीरे-धीरे सीखी, अब ले रहीं अवधी का आनंद
अवधी भाषा ने मोहा दक्षिण भारतीय डॉक्टर का दिल, पोस्ट वीडियो को पसंद कर रहे लोग
रमन मिश्र, गोंडा, जागरण। "हथवा झनझनात हय... पेटवा गड़गड़ात हय... पेटवा मरोड़त हय... जिवा घबरात हय..."—गोंडा नर्सिंग होम में जब कोई मरीज अपनी बीमारी का हाल कुछ इस तरह सुनाता है, तो वहां मौजूद वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. अनीता मिश्रा के चेहरे पर एक आत्मीय मुस्कान तैर जाती है। मरीजों की यह ठेठ बोली उनके लिए केवल बीमारी का विवरण नहीं, बल्कि किसी सुंदर कविता की पंक्तियों जैसी महसूस होती है।
मूल रूप से कर्नाटक के बेंगलुरु की रहने वाली डॉ. अनीता मिश्रा का यह सफर बेहद अनोखा और प्रेरणादायक है। कन्नड़ और तुलु भाषा की पृष्ठभूमि में पली-बढ़ीं डॉ. अनीता की संपूर्ण शिक्षा-दीक्षा कर्नाटक में ही हुई। लेकिन जब उनका विवाह गोंडा के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. पुण्योदय मिश्र से हुआ, तो गोंडा ही उनकी कर्मभूमि बन गया।
आसान नहीं था अवधी बोली को समझना
पिछले 22 वर्षों से गोंडा में चिकित्सा सेवाएं दे रहीं डॉ. अनीता के लिए शुरुआत में अवधी बोली को समझना आसान नहीं था। भाषा और संस्कृति का यह अंतर किसी के लिए भी एक चुनौती हो सकता था, लेकिन डॉ. अनीता ने इसे एक अवसर के रूप में स्वीकार किया। उन्होंने न केवल हिंदी और अवधी को सीखा, बल्कि उत्तर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को भी पूरे हृदय से अपना लिया।
सहजता और आत्मीयता उनकी सबसे बड़ी ताकत
मरीजों से बात करने की उनकी यही सहजता और आत्मीयता उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। डॉ. अनीता मानती हैं कि डॉक्टरी सिर्फ दवा देने का काम नहीं है; जब आप मरीज से उसकी अपनी भाषा में बात करते हैं, तो उसका आधा दर्द वैसे ही कम हो जाता है। "हमका तौ मरीजन से बातै करै मा मजा आवत है..."—उनकी यह सोच अवधी के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाती है।
एक मिनट 41 सेकंड का एक बेहद खूबसूरत वीडियो
हाल ही में उन्होंने अपनी इस 22 वर्षों की सांस्कृतिक और भाषाई यात्रा को समेटते हुए एक मिनट 41 सेकंड का एक बेहद खूबसूरत वीडियो इंटरनेट मीडिया (इंस्टाग्राम) पर साझा किया है। इस वीडियो में उन्होंने बताया है कि अवधी बोली में कितनी मिठास और अपनापन छुपा है।
'शुरुआत में अवधी सुनकर फंस गई थी'
हालांकि, भाषा को समझना हमेशा आसान नहीं होता। डॉ. मिश्रा को एक मरीज के साथ हुई बातचीत याद आई, जिसने उनसे पूरी तरह अवधी में बात की थी। उन्होंने मजाक में कहा, "मैं इसे समझ सकती हूं, लेकिन आज मरीज मुझसे अवधी में बात कर रहा था। तब मैं फंस गई। मैं उसे फिर से समझ नहीं पाई।"
डॉक्टर ने कहा कि उनके अनुभव ने उन्हें सिखाया है कि अवधी सीखना जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, "अवधी कोई ऐसा कोर्स नहीं है जिसे आप एक दिन में पूरा कर लें। अवधी सीखना जीवन भर का सफर है।" उन्होंने उस भाषा और उस जगह की तारीफ करते हुए एक खुशनुमा संदेश के साथ वीडियो खत्म किया, जिसे अब वह अपना घर मानती हैं, "जय अवधी! जय गोंडा!"
'क्लासिक मिसेज इंटरनेशनल' का प्रतिष्ठित खिताब जीत चुकीं डॉ.
वर्ष 2022 में 'क्लासिक मिसेज इंटरनेशनल' का प्रतिष्ठित खिताब जीत चुकीं डॉ. अनीता का मानना है कि, "अवधी जितना सीखो उतना कम है, और जितना बोलो उतनी ही खुशी मिलती है। अवधी भाषा कोई ऐसा कोर्स नहीं है जिसे पढ़कर खत्म कर दिया जाए, बल्कि यह तो जीवन भर चलने वाली एक खूबसूरत यात्रा है।"
दक्षिण भारत से आकर अवधी की मिठास रचने वाली इस डॉक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है और हजारों लोग इसे लाइक व शेयर कर रहे हैं। डॉ. अनीता मिश्रा का यह सफर साबित करता है कि भाषाएं दूरियां नहीं बनातीं, बल्कि अगर दिल में अपनापन हो, तो भाषा दिलों को जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया बन जाती है। महिला डॉक्टर अनिता मिश्रा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।
