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नमो देव्यै महादेव्यै: 'शक्ति' को संबल देकर समाज को आईना दिखा रहीं गोंडा की रुचि मोदी

Published: Thu, 15 Oct 2026 04:18 PM (GMT+05:30)

गोंडा की अधिवक्ता रुचि मोदी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बेटियों को शिक्षित करने में जुटी हैं।

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HighLights

  1. पांच वर्षों में 200 बेटियों को इंटरमीडिएट तक शिक्षित किया।

  2. तीन तलाक मामलों में महिलाओं को नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान।

  3. अवैध शराब कारोबार से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।

जागरण संवाददाता, गोंडा। यूं ही कट जाएगा सफर साथ चलने से, कि मंजिल आएगी नजर साथ चलने से..., गुजरे जमाने के इस मशहूर फिल्मी गीत को बड़गांव निवासी अधिवक्ता रुचि मोदी अपनी जिंदगी का तराना बना चुकी हैं। बुलंद हौसले व मजबूत इरादों से न सिर्फ महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही हैं, बल्कि शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़कर बेटियों का कल संवार रहीं हैं।

पांच वर्षों में वह 200 बेटियों को इंटरमीडिएट तक शिक्षित करा चुकी हैं। साथ ही, तीन तलाक के मामलों में निश्शुल्क पैरवी कर महिलाओं को न्याय दिला रही हैं। शक्ति को संबल देने की रूचि की यह पहल सरकारी अमले को भी आइना दिखा रही है।

वर्ष 2015 में जिले में अवैध कच्ची शराब का कारोबार लघु उद्योग का रूप ले चुका था। इसमें महिलाएं भी शामिल थीं और शराब के कारण परिवार उजड़ रहे थे। यह देखकर रुचि ने अवैध शराब का कारोबार बंद कराने का प्रयास शुरू किया। शुरुआत में उन्हें डर लगा, लेकिन कुछ लोग उनके साथ आए। उन्होंने इस कारोबार से जुड़ी महिलाओं को सिलाई मशीनें दीं और प्रशिक्षण भी दिलाया।

अब ये महिलाएं सिलाई-कढ़ाई के जरिए परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। रुचि के अनुसार, जिले में अभिभावक बेटियों को स्कूल भेजने में संकोच करते थे। महिलाओं को अशिक्षा के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था।

वर्ष 2015 में उन्होंने बालिकाओं को शिक्षित करने का संकल्प लिया। रास्ते में आई मुश्किलों के बावजूद वह आगे बढ़ती रहीं। वह हर वर्ष 30 से 40 बेटियों का सरकारी स्कूलों में दाखिला कराती हैं और उनकी पूरी फीस एक बार में जमा करती हैं।

उनका मानना है कि शिक्षा से ही बालिकाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। वह पढ़ाई से वंचित बेटियों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने के साथ उनके अधिकारों के प्रति जागरूक भी करती हैं। रुचि का प्रयास है कि आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियां किसी बालिका की शिक्षा में बाधा न बनें। पीड़ितों को न्याय दिलाने के उनके प्रयास महिलाओं और बालिकाओं के अधिकारों को लेकर जागरूकता बढ़ा रहे हैं।