गोंडा : बगैर मान्यता संचालित स्कूलों को बंद कराने के शासन के फरमान को अमलीजामा पहनाने के दावे भले ही अफसर कर रहे हो लेकिन जमीन पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हां, बीईओ ने 235 स्कूल संचालकों को नोटिस भेजने का दावा करते हुए रिपोर्ट दी लेकिन वर्ष जुलाई में चिन्हित स्कूल के प्रबंधकों पर कार्रवाई नहीं की जा सकी है। इसी का लाभ उठाते हुए प्रबंधक मनमाने तरीके से बेखौफ होकर स्कूलों को संचालन करा रहे है।बेसिक शिक्षा विभाग जिले में 3100 परिषदीय स्कूलों का संचालन करा रहा है, जिसमें प्रशिक्षित शिक्षक की तैनाती है। दोपहर में भोजन से लेकर छात्रों के लिए अन्य कई तरह की योजनाएं संचालित है। सरकारी स्कूल में बेहतर पढ़ाई न होने की सोच के चलते अभिभावक वहां नामांकन नहीं कराते हैं। वह निजी स्कूलों में नामांकन कराते हैं। इसका लाभ उठाने के लिए गांव-गांव स्कूलों की भरमार हो गयी है। इनको विभाग ने मान्यता भी नहीं दी। बावजूद इसके संचालन हो रहा है। पिछले वर्ष जुलाई में शासन ने इनको बंद कराने का निर्देश दिया। इसके बाद कर्नलगंज, परसपुर, मनकापुर, बेलसर, वजीरगंज, मुजेहना सहित अन्य बलॉकों में 235 स्कूल चिन्हित किए गए। इनको नोटिस भेजने के साथ ही विजिट कर बंद कराने का दावा भी किया गया लेकिन संचालन अभी तक हो रहा है। प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी यज्ञ नारायण वर्मा का कहना है कि स्कूल प्रबंधकों को नोटिस भेजा गया था। अभियान चलाकर उनको बंद कराने की कार्रवाई हुई। कुछ लोगों ने दोबारा संचालन शुरू कर दिया है। चिन्हित कर उन पर कार्रवाई होगी।

नहीं किया जुर्माना- इन स्कूलों में अप्रशिक्षित अध्यापक शिक्षण कार्य करते हैं, जिससे छात्रों के भविष्य से मजाक हो रहा है। शासन के निर्देश के बाद भी मनमानी चल रही है। वहीं विभाग के अधिकारी बंद कराना दूर उन पर जुर्माना तक नहीं लगाया जा सका है। जिससे संचालन बदस्तूर जारी है।

Posted By: Jagran

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