गोंडा : मनरेगा के संचालन में पारदर्शिता लाने की मुहिम भी दम तोड़ने लगी है। यहां परियोजना स्थल पर जनसूचना बोर्ड (सीआइबी) की स्थापना में भी खेल शुरू हो गया है। कहीं बोर्ड लगते ही नहीं तो कहीं बोर्ड में खर्च का ब्योरा दर्ज नहीं किया जा रहा है। ऐसे में पब्लिक को खर्च की जानकारी नहीं हो पा रही है। ये हाल तब है जब परियोजना स्थल पर सीआइबी बोर्ड की स्थापना के बाद ही अंतिम भुगतान का दावा किया जा रहा है। मनरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2021-22 में 6309 परियोजनाएं शुरू हुई थी, इसमें से सिर्फ 43 परियोजनाएं पूरी हुई हैं। इनपर करीब 35 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पेश है एक रिपोर्ट ।

------------

तालाब अधूरा, कितना खर्च हुआ पता नहीं

- बेलसर ब्लाक की ग्राम पंचायत आदमपुर में गो-संरक्षण केंद्र का निर्माण कराया गया है। परिसर में मनरेगा से दो तालाब का निर्माण शुरू कराया गया था, लेकिन अभी कार्य अधूरा है। परिसर में ही जनसूचना बोर्ड की स्थापना की गई है, लेकिन बोर्ड में वर्कआइडी नंबर, कार्य की माप, लागत, खर्च, सृजित मानव दिवस के बारे में कोई जानकारी दर्ज नहीं की गई है। यही हाल परसपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत सालपुर धौताल का है। यहां डोमाकल्पी संपर्क मार्ग से बड़कऊ अवस्थी के मड़हा तक मिटटी कार्य के लिए बोर्ड लगाया है। बोर्ड में स्वीकृत लागत है तो ,लेकिन कितनी खर्च हुई, कब कार्य शुरू हुआ और कब समाप्त हुआ, इसकी कोई जानकारी दर्ज नहीं है।

---------------

अलग-अलग है रेट

- जन सूचना बोर्ड की स्थापना के लिए मनरेगा में अलग-अलग रेट निर्धारित किए गए हैं। यदि परियोजना सामूहिक है तो पांच हजार रुपये व व्यक्तिगत होने पर 3500 रुपये भुगतान किए जाते हैं।

-------------

- मनरेगा के तहत सभी परियोजनाओं पर जन सूचना बोर्ड लगवाने के निर्देश हैं। यदि बोर्ड में आवश्यक सूचनाएं दर्ज नहीं की जा रही हैं तो ये गलत है। मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

- एनबी सविता, उपायुक्त श्रम एवं रोजगार गोंडा

Edited By: Jagran