गोंडा: जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में पैसे लेकर खून देने का मामला सामने आया है। शहर के एक निजी नर्सिंगहोम में भर्ती महिला मरीज के तीमारदार का आरोप है कि पहले तो खून न होने की बात कहकर वापस कर दिया गया, बाद में एक दलाल के माध्यम से उससे साढ़े सात हजार रुपये लेकर खून दे दिया गया। इस मामले को लेकर हुए हंगामे के बाद अब मामले की जांच शुरू हो गयी है। कई कर्मचारियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है।

विशुनपुर बैरिया गांव के पवन कुमार ने अपनी मां उर्मिला देवी को बीमारी के कारण शहर के एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया। वहां के डॉक्टरों ने उसे दो यूनिट ब्लड की आवश्यकता बताई। उसकी मां का ग्रुप ए पॉजिटिव था। जब वह ब्लड लेने के लिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंचे तो कर्मियों ने बताया कि संबंधित ग्रुप का खून ही नहीं है। इसके बाद उसे एक बाहरी व्यक्ति मिला। उसने उसे खून दिलाने का वादा किया। आरोप है कि साढ़े सात हजार रुपये लेकर कुछ देर में ही उसने ब्लड बैंक के कर्मियों से मिलकर बिना डोनर के ही ब्लड दिलवा दिया। इस बात की जानकारी उसने अपनी करीबी गौरव ¨सह को दी। जिसके बाद हंगामा मच गया। उन्होंने समर्थकों के साथ ब्लड बैंक पहुंचकर इस मामले की शिकायत सीएमएस से की। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. वीरपाल ने पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कई अन्य मरीजों के तीमारदारों से पूछताछ की है। साथ ही रिकार्ड तलब किए हैं।

जिम्मेदार के बोल

- ब्लड बैंक का मामला संज्ञान में है। पूरे मामले की जांच हो रही है। जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई जरूर होगी।

- डॉ. वीरपाल, सीएमएस जिला अस्पताल।

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