नंदलाल तिवारी, गोंडा: पहली दिसंबर को विश्व एड्स दिवस है। कोरोना ने भले ही लोगों को लाखों दर्द दिए हो, लेकिन एचआइवी के बढ़ते संक्रमण पर इससे लगाम लगी है। बीते तीन साल के आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि कोरोना ने एचआइवी पर अंकुश लगाने में अहम भूमिका निभाई है। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग की टीम अब लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. समीर गुप्ता का कहना है कि अब तक जो मरीज आए हैं, उसमें से अधिकांश में रोजी रोटी की तलाश में मुंबई, दिल्ली व हरियाणा जैसे हाईरिस्क क्षेत्र में जाने वाले लोग शामिल हैं। ऐसे में यह परदेसी रोग भारी पड़ रहा था। कोरोना के कारण लोगों ने जब बाहर जाना बंद किया तो बीमारी के प्रसार पर काफी हद तक रोक लगी है।

वर्ष 2019-20 में एचआइवी के 196 मरीज मिले थे। इसमें 96 पुरुष, 82 महिला व 18 दस साल से कम आयु के बच्चे शामिल है। 2020-21 में घटकर यह 136 हो गए। इसमें 73 पुरुष, 54 महिलाएं व 9 दस साल से कम आयु के बच्चे हैं। वर्तमान में अप्रैल से अब तक मात्र 58 मरीज मिले हैं। 2014 से अब तक 1427 मरीजों का इलाज चल रहा है। सरकारी प्रयास:

सीएमओ डॉ. आरएस केसरी का कहना है कि एचआइवी की जांच जिला अस्पताल समेत अन्य सात स्वास्थ्य इकाइयों पर उपलब्ध है। बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चल रहा है। मुफ्त इलाज की व्यवस्था भी है। -------- क्या है एड्स

- एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिसिएंशी सिड्रोम यानी एड्स एक ऐसी बीमारी है, जो एचआईवी नामक रेट्रोवायरस से फैलती है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है, नतीजतन कई तरह के संक्रमण होने लगते हैं। एचआईवी संक्रमण की अंतिम स्थिति को एड्स कहा जाता है।

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क्या है वजह

- एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करना। - ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान शरीर में एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने पर।

- एचआईवी संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन का इस्तेमाल करने से।

Edited By: Jagran