तूफान-बारिश से चरमराई बिजली व्यवस्था: 900 खंभे टूटे और 200 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त, लाइट को तरसी 30 लाख की आबादी
गोंडा जिले में चार दिनों से लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण बिजली आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई ...और पढ़ें

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HighLights
गोंडा में बारिश-तूफान से बिजली आपूर्ति व्यवस्था चरमराई।
900 से अधिक खंभे, 200 ट्रांसफार्मर क्षतिग्रस्त हुए।
30 लाख से अधिक आबादी पेयजल संकट से प्रभावित।
जागरण टीम, गोंडा। चार दिनों से जिले में लगातार हो रही बारिश और तेज हवा जिले की बिजली आपूर्ति व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। शुक्रवार रात बारिश के चली तेज हवा ने बिजली व्यवस्था के संकट को और गहरा दिया। हाईवे से लेकर गांवों-कस्बों में पेड़ और उनकी शाखाएं टूटकर बिजली के खंभों व लाइनों पर गिर गईं।
इससे जिले में 900 से अधिक बिजली के खंभे टूट गए, जबकि कई स्थानों पर तार और बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं। इतना ही नहीं लगभग 200 ट्रांसफार्मर भी क्षतिग्रस्त हो गए। बिजली संकट का सीधा असर जिले की 30 लाख से अधिक नागरिकों की दिनचर्या पर पड़ा है। सभी की चिनचर्या प्रभावित हो गई है। यहां तक कि मुख्य अभियंता बिजली दफ्तर परिसर में ही पांच पेड़ गिर गए और आपूर्ति भी बाधित हो गई है।
मंडल मुख्यालय समेत गांवों में अंधेरा
नगर के अधिकांश के मुहल्लों में शुक्रवार रात करीब दो बजे से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। पंतनगर, सिविल लाइन, मेडिकल कालेज के निकट सहित कई मुहल्लों में खंभे और लाइन पर पेड़ टूट कर गिर गए। डीएम आवास के सामने लखनऊ हाईवे पर और जिला जज आवास परिसर में पेड़ गिरने से हाईटेंशन लाइन क्षतिग्रस्त हो गई।
दूसरी ओर जिले के कई गांवों और कस्बों में पिछले तीन दिनों से बिजली न आने के कारण लोग परेशान हैं। सबसे अधिक परेशानी पेयजल को लेकर हो रही है। बिजली के अभाव में नलकूप और मोटर नहीं चल पा रहे हैं, जिससे पानी का संकट खड़ा हो गया है।
घर सहित दफ्तरों में कार्य प्रभावित
बिजली कटौती का असर घरों के साथ सरकारी दफ्तरों में कामकाज पर भी पड़ा है। लगातार आपूर्ति बाधित रहने से इन्वर्टर भी जवाब दे गए हैं। मोबाइल फोन और लैपटाप चार्ज न होने से जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई से लेकर आन लाइन कार्य तक बाधित हैं। सरकारी कार्यालयों में कार्य प्रभावित हुआ। बारिश के बीच रात में अंधेरे में रहने को मजबूर लोगों के लिए स्थिति और मुश्किल हो गई है। लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिजली आपूर्ति कब सामान्य होगी।
बिजली आपूर्ति बहाल करने में जुटे कर्मचारियों के सामने भी मौसम बड़ी चुनौती बना हुआ है। लगातार बारिश और तेज हवा के कारण क्षतिग्रस्त लाइनों तक पहुंचने, टूटे पेड़ों को हटाने और नए खंभे लगाने में दिक्कत आ रही है। कई स्थानों पर पेड़ और उनकी भारी शाखाएं बिजली लाइनों पर गिरी हैं।
पहले इन्हें काटकर हटाना पड़ रहा है, इसके बाद टूटे खंभों को हटाकर नए खंभे लगाने और क्षतिग्रस्त तारों को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। तेज हवा के बीच लाइन पर काम करना भी जोखिम भरा है। बारिश के कारण जमीन गीली होने से कर्मचारियों को उपकरण और खंभे लगाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।
आपूर्ति बहाल कराना सर्वाेच्च प्रथमिकता
चार दिनों से हो रही बारिश और उसके साथ तेज हवा चलने के कारण कई स्थानों पर पेड़ टूट कर खंभों और लाइनों पर गिरे हैं। इनका सर्वे कराकर पेड़ों को कटवा कर नए खंभे लगवा कर लाइनों को सही कराने के लिए विभागीय कर्मियों के साथ विभाग का कार्य करने वाले सभी फर्मों के ठेकेदारों को लगाया गया है। जल्द ही आपूर्ति बहाल कराना सर्वोच्च प्राथमिकता में है। अभी तक गोंडा में करीब 900 समेत मंडल के चारों जिलों में दो हजार से अधिक खंभों के गिरने की सूचना है। खंभों और लाइनों के क्षति होने की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। - यदुनाथ यथार्थ, मुख्य अभियंता बिजली
