अजय पांडेय, गोंडा :

केस-एक

- संत भगत सिंह परसपुर के कंपोजिट विद्यालय कुड़ियांव से 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए। इनकी पेंशन पत्रावली वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में लंबित है। चार माह से बुजुर्ग संत भगत कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।

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केस-दो

परसपुर के ही परिषदीय स्कूल में तैनात रहे तिलकधारी यादव की मौत 28 अगस्त 2018 को हो गई है। उनकी पत्नी ने पेंशन के लिए आवेदन किया था लेकिन, तीन वर्षों से वह चक्कर काट रही हैं। कई बार शिकायत के बाद भी जिम्मेदार मूक बने हैं।

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केस-तीन

परसपुर के ही प्राथमिक विद्यालय वृंदावन में तैनात रहे विजय शंकर राम की मौत सात मार्च 2017 को हो गई थी। इनकी पत्नी को भी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा है। इनकी पत्रावली भी लेखाधिकारी कार्यालय में धूल फांक रही है। ये तीन मामले महज बानगीभर हैं। वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक कार्यालय में पारिवारिक पेंशन की फाइलें धूल फांक रही हैं। यहां बाबुओं की मनमानी चल रही है। जिन पत्रावली में लिपिकों की मंशा पूरी हो जाती है उनका निस्तारण कर दिया जाता है। बाकी फाइलें पड़ी रहती हैं। पीड़ित कार्यालय का चक्कर काटते हैं। उन्हें कमी बताकर दौड़ाया जाता है। ऐसा दूसरे जनपदों के रहने वालों के साथ अधिक होता है। वह हर समय कार्यालय नहीं आ पाते। यह सब तब हो रहा है जब उच्च न्यायालय ने पेंशन को सेवा का अधिकार बताया है। बावजूद इसके यहां लेखाधिकारी कार्यालय में मनमानी हावी है।

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पत्रावली का निस्तारण न होना दुर्भाग्यूपूर्ण

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष इंद्रप्रताप सिंह का कहना है कि परिवार का कमाने वाला जब चला जाता है तो स्थिति बेपटरी हो जाती है। ऐसे में पेंशन पत्रावली का निस्तारण न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। लेखाधिकारी कार्यालय में मनमानी की जाती है। जीपीएफ पासबुक भी नहीं दिया जा रहा है।

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बोले जिम्मेदार

- वित्त एवं लेखाधिकारी बेसिक मंगलेश सिंह पालीवाल का कहना है कि उनकी जानकारी में प्रकरण नहीं है। वह कार्यालय पहुंचकर संबंधित पत्रावली के बारे में जानकारी करेंगे। भुगतान कराया जाएगा।

Edited By: Jagran