चकबंदी निरस्त होने से दाखिल खारिज का काम अटका, गोंडा में भटक रहे दो हजार खरीदार
गोंडा के तरबगंज तहसील के ढोंढ़ेपुर गांव में चकबंदी निरस्त होने से दो हजार से अधिक खरीदार बैनामे की दाखिल खारिज के लिए परेशान हैं।

HighLights
चकबंदी निरस्त होने से दो हजार से अधिक खरीदार परेशान।
1992 से 2023 के बैनामों की दाखिल खारिज लंबित।
भूमि खरीद-फरोख्त, बैंक ऋण जैसे राजस्व कार्य प्रभावित।
जागरण संवाददाता, गोंडा। तरबगंज तहसील के ग्राम ढोंढ़ेपुर में बैनामे की दाखिल खारिज के लिए दो हजार से अधिक खरीदार परेशान हैं। चकबंदी प्रक्रिया 1992 में शुरू हुई थी, जिसे 2021 में नगर पंचायत के रूप में पुनर्गठित किया गया।
हाल ही में, 2023 में शासन ने चकबंदी प्रक्रिया को निरस्त कर दिया और संबंधित अभिलेख तहसील को वापस भेज दिए। इसके परिणामस्वरूप, 1992 से 2023 के बीच हुए बैनामे की दाखिल खारिज और वरासत के आदेश गायब हो गए हैं।
तहसील प्रशासन ने चकबंदी विभाग को दी गई खतौनी को कंप्यूटर में फीड कर दिया, लेकिन वरासत की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद, दो हजार से अधिक बैनामे की दाखिल खारिज अब तक नहीं हो पाई है।
गांव में कुल 1,813 गाटे हैं। चकबंदी समाप्त होने के बाद अभिलेख राजस्व विभाग को हस्तांतरित कर दिए गए, लेकिन नामांतरण और अभिलेखों के समायोजन का कार्य अब भी लंबित है। इससे भूमि की खरीद-फरोख्त, बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं का लाभ और अन्य राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
किसानों का कहना है कि पहले चकबंदी कार्यालय की परिक्रमा करनी पड़ी और अब राजस्व विभाग में पहुंचने के बाद भी मामले निस्तारित नहीं हो रहे हैं। कभी पत्रावली की अनुपलब्धता, कभी अभिलेखों की कमी, तो कभी अन्य तकनीकी कारणों का हवाला देकर मामलों को टाल दिया जाता है।
किसान बड़का ने बताया कि उन्होंने सात जनवरी 2026 को नामांतरण के लिए आवेदन किया था, जिसे एक माह बाद बिना कारण निरस्त कर दिया गया। बलराम ने कहा कि उनके पिता ने 2003 में भूमि खरीदी थी, लेकिन अब दोबारा आवेदन करने पर केवल पोर्टल पर निस्तारण दिखाया गया।
छोटका ने पंजीकृत वसीयत के आधार पर दाखिल-खारिज के लिए आवेदन किया, लेकिन आदेश लंबित रखा गया। सूर्य प्रसाद मिश्र ने बताया कि 2009 में खरीदी गई भूमि की दाखिल-खारिज चकबंदी के दौरान हो चुकी थी, लेकिन चकबंदी समाप्त होने के बाद आवेदन निरस्त कर दिया गया। किसानों ने जिला प्रशासन से लंबित दाखिल-खारिज और अभिलेख संशोधन के मामलों का समयबद्ध निस्तारण कराने की मांग की है।
तहसीलदार न्यायिक अहमद हसन ने कहा कि न्यायालय में लंबित नामांतरण प्रकरणों का नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है। जिन मामलों में पत्रावलियां पूर्ण हैं, उनमें नामांतरण के आदेश पारित किए जा रहे हैं।
-अहमद हसन, तहसीलदार न्यायिक
