गोंडा : अमेरिका के न्यू जर्सी में बसे अप्रवासी भारतीय डॉ. दीपेन सिन्हा का गांव की मिट्टी से मोह नहीं छूटा। गांव के लोगों की मुफलिसी का दर्द करीब से समझा था। अब उसे दूर करने को तन-मन व धन से जतन कर रहे। उनके इस प्रयास से न सिर्फ कई परिवार गरीबी की बेड़ियों से आजाद हो रहे बल्कि गांव में बदलाव की बयार भी बह रही। रोजगार, अस्पताल, स्वच्छता व शिक्षा को लेकर उनकी पहल को हर कोई सलाम कर रहा।

वजीरगंज ब्लॉक में ग्राम पंचायत नौबस्ता है। इस गांव में सड़क के किनारे नौबस्ता इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड नाम से बिजली के खंभे बनाने वाली फैक्ट्री संचालित है। वर्तमान में 50 लोग काम कर रहे। राजेश गोस्वामी, दूधनाथ, इंद्रदेव समेत 10 लोग काम करते मिले। 72 खंभों का उत्पादन रोजाना हो रहा है। इसी परिसर में बने भवन में एलईडी बल्ब बनाने का काम हो रहा था। अनीता यादव, परमानंद, राजू समेत आठ लोग अपने काम में तल्लीन मिले। मैनेजर आशीष द्विवेद्वी व वीरेंद्र सिंह दोनों इकाइयों के संचालन का काम देखते हैं। इन्होंने बताया गांव के रामेश्वरनाथ सिन्हा करीब चार दशक तक प्रधान थे। इनकी पत्नी कृष्णा सिन्हा भी प्रधान रहीं। इनके पुत्र डॉ. दीपेन सिन्हा द्वारा यह इकाइयां संचालित हैं। इसमें ग्राम पंचायत के लोग ही काम कर रहे। अमेरिका में बसे दीपेन 2008 से खुद की एटीसी नामक कंपनी चला रहे। ये कंपनी रेडियो स्टेशन की स्थापना के लिए सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर तैयार करती है। 2011 में पिता का निधन होने के बाद आरएन सिन्हा फाउंडेशन बनाया और दूसरे-तीसरे माह गांव आने लगे। गांव में गरीबी व बेरोजगारी को देखकर उन्होंने इसे दूर करने का बीड़ा उठाया।

विदेशी मुद्रा की होती बारिश

पोल फैक्ट्री के मैनेजर आशीष बताते हैं कि भइया (डॉ. दीपेन सिन्हा) कामगारों को विदेश में काम करने में मदद करते हैं। बकौल आशीष वह खुद दो साल तक अफ्रीका व मलेशिया में नौकरी कर लौटे। अजीत पांडेय भी दुबई, मस्कट व कुबैत में नौकरी कर वापस आ चुके। इसी तरह सुशील जायसवाल को थाईलैंड भेजा गया था। इनके अलावा 20 से अधिक लोग विभिन्न देशों में काम कर रहे हैं। इससे विदेशी मुद्रा की बारिश भी हो रही।

13 गांवों को गोद ले संवार रहे दीपेन

ग्राम पंचायत में बदलाव के लिए डॉ. दीपेन ने 13 गांवों को गोद लिया है। आरएन सिन्हा फाउंडेशन के मैनेजर सुरेश श्रीवास्तव ने बताया कि नौबस्ता, कोमर, धुसवा, लाला का पुरवा, निश्चलपुर, दुबौली व लोहनडीह में 12 लोगों का मकान व छत बनवाया गया। 350 शौचालय बनाने में मदद की गई। लड़कियों की शादी, इलाज में मदद करने के साथ ही 250 हैंडपंप भी लगवाए गए।

Posted By: Jagran

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