जागरण टीम, गोंडा : बाढ़ ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। सकरौर-भिखारीपुर तटबंध पर खतरा मंडराने लगा है। तटबंध को बचाने के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार नदी में समा गई। वहीं, पांच ग्रामीणों के घर भी कटान की भेंट चढ़ गए।

शुक्रवार को नदियों का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ ने तबाही मचाना शुरू कर दिया है। अमदहीबाजार : तरबगंज तहसील के ऐलीपरसौली में नदी तेजी से कटान कर रही है। विशुनपुरवा गांव के पास नदी सकरौर-भिखारीपुर तटबंध में कटान कर रही है। तटबंध को बचाने के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार नदी में समा गई। इसी स्थान पर गत वर्ष तटबंध टूटा था। वहीं, कटान की जद में आने से पांच ग्रामीणों के घर भी नदी में समा गए। ब्योंदामाझा, जबरनगर, बहादुरपुर, परास, गढ़ी गांव में भी मार्ग जलमग्न हो गए हैं। करीब एक हजार बीघा बीघा फसल नदी में डूब गई है। नवाबगंज : बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा है। यहां बाढ़ का पानी नदी से निकलकर खेत-खलिहान होते हुए गांव में पहुंच गया है। लोग सुरक्षित स्थान पर पलायन कर रहे हैं। परसपुर : चंदापुर किटौली में भी ग्रामीणों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। यहां लोग एल्गिन-चरसड़ी तटबंध के स्पर पर डेरा जमाए हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। अधीक्षण अभियंता सिचाई पंचदशम मंडल त्रयंबक त्रिपाठी का कहना है कि नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी खतरे के निशान से 77 व अयोध्या में सरयू नदी 41 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। घाघरा नदी में 4.50 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है। उन्होंने बताया कि तटबंध की निगरानी के साथ ही बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

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किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग

- तरबगंज विधायक प्रेमनरायन पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बाढ़ व बारिश से हुए नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिलाने की मांग की है। उनका कहना है क्षेत्र के 80 प्रतिशत लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है। बारिश व बाढ़ के कारण फसल नष्ट हो गए है। ऐसे में किसानों के सामने जीविकोपार्जन का संकट उत्पन्न हो गया है।

Edited By: Jagran