गोंडा: न्याय न मिलने से हताश सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता ने सोमवार को कमरे में रस्सी के सहारे फांसी लगा ली। इससे पहले उसने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया था। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक आरपी ¨सह ने विवेचना करने वाले दो निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया, जबकि कोतवाल को भी हटा दिया। घटना कर्नलगंज कोतवाली क्षेत्र की है।

पीड़िता के पति ने बताया कि वह रोजी-रोटी के सिलसिले में हरियाणा गया था। इसी का फायदा उठाकर गांव के ही श्याम कुमार उर्फ बुधई व शंकर दयाल उर्फ बबलू उसकी पत्नी के पास पहुंचे। उसके हरियाणा में किसी दूसरी महिला से संबंध हो जाने की बात कहकर पत्नी को गुमराह करने लगे। दोनों लोगों ने खुद को तांत्रिक विद्या का जानकर बताकर उसे ब्लैकमेल किया। गत वर्ष सात फरवरी को उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करके वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर दुष्कर्म करते रहे। परेशान होकर पीड़िता ने आपबीती उसे सुनाई। इस पर मामले की तहरीर कोतवाली में दी गई। गत वर्ष सात अगस्त को पुलिस ने दोनों आरोपितों के विरुद्ध दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। विवेचक इंस्पेक्टर अजीत प्रताप ¨सह ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। कार्रवाई समाप्त होता देखकर पीड़िता ने लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास के सामने 15 सितंबर 2018 को आत्मदाह करने का प्रयास किया। इसपर तत्कालीन एसपी ने केस क्राइम ब्रांच को सौंपा। क्राइम ब्रांच विवेचक ने पूर्व की कार्रवाई को सही ठहराया। इससे आहत होकर महिला ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। एसपी ने बताया कि यह मामला उनके पूर्व का है। मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए विवेचना मनकापुर कोतवाल को सौंपते हुए एएसपी को पर्यवेक्षणीय अधिकारी नामित किया गया है।

Posted By: Jagran