गोंडा : विकास भवन में मारपीट करने के मामले में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य) व मत्स्य विकास अधिकारी अनुशासनहीनता बरतने के मामले में दोषी ठहराए गए हैं। जांच के बाद संबंधित अफसरों के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संस्तुति निदेशक को भेजी गयी है। मामला विकास भवन का है। गत 14 जून को सीडीओ कार्यालय के बाहर उक्त दोनों आपस में भिड़ गए थे। आरोप है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी नन्हेलाल कश्यप ने कोटा सत्यापन के नाम पर पैसा मांगा, जबकि दूसरी तरफ सहायक मत्स्य विकास अधिकारी रितेश कुमार शाही पर कार्यालय में न आने के साथ ही टोकने पर अभद्रता करने का आरोप है। शिकायतों को लेकर सीडीओ ने दोनों अफसरों को कार्यालय में बुलाया था। कक्ष में जाने से पहले ही दोनों आपस में ही भिड़ गए, मामला मारपीट तक पहुंच गया। दैनिक जागरण ने 15 जून के अंक में पल भर में अखाड़ा बन गया विकास भवन शीर्षक से समाचार का प्रकाशन प्रमुखता से किया था। खबर का संज्ञान लेते हुए देवीपाटन मंडल के मंडलायुक्त सुधेश कुमार ओझा ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। जांच उपायुक्त स्वत : रोजगार से कराई गई, जिसमें उक्त दोनों दोषी पाए गए। सीडीओ अशोक कुमार ने बताया कि मत्स्य निदेशक को आरोपियों के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संस्तुति भेजी गयी है।

Posted By: Jagran