गोंडा: स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही बरतने वालों पर कार्रवाई तेज हो गई है। मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर नामित होने के बाद भी नियत तिथियों पर उपस्थित न होने पर जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. मलिक आलमगीर फंस गए हैं। वह 16 अप्रैल को मेडिकल बोर्ड की बैठक में नहीं पहुंचे थे, जिससे संबंधित मामले में जांच नहीं हो सकी है। इस पर उन्हें कारण स्पष्ट करने के साथ ही 25 अप्रैल को अपराह्न दो बजे मेडिकल बोर्ड की दोबारा बुलाई गई बैठक में आने को कहा गया है।

सीएमओ डॉ एसके श्रीवास्तव ने फॉ¨गग से संबंधित मलेरिया अधिकारी की लॉगबुक की जांच में कई खामियां पकड़ी है। वर्ष 2014 से तैयार इस बुक में दो से चार घंटे की फा¨गग कराने की बात कही जा रही है। जबकि फा¨गग गोधूलि बेला में कराई जाती है। इसे गंभीरता से लेते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के पीयर एजूकेटर के प्रशिक्षण संबंधी सूचना के अदान-प्रदान में लापरवाही बरतने के आरोप में मनकापुर के अधीक्षक व कनिष्ठ सहायक फूलकुवंरि, परसपुर के अधीक्षक एमपी यादव व कनिष्ठ सहायक काली प्रसाद पांडेय, खरगूपुर के अधीक्षक डॉ. जेपी शुक्ला व कनिष्ठ सहायक विवेकमणि त्रिपाठी से भी जवाब मांगा गया है। जवाब न मिलने पर कार्रवाई की बात कही गई है।

जांच के आदेश

- जिला अस्पताल में इलाज के लिए पैसा मांगने के मामले में संबंधित चिकित्सक के खिलाफ जांच शुरू हो गई है। सीएमएस डॉ. अरुण लाल ने बताया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में डीएम जेबी ¨सह ने भी रिपोर्ट तलब की है।

By Jagran