गोंडा: बच्चों को पोलियो जैसी बीमारी से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। टीकाकरण सत्रों में इसकी वैक्सीन लगाई जा रही है। इसके लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित भी किया गया है। बावजूद इसके शहर के एक आंगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण के दौरान एक्सपायर पोलियोरोधी वैक्सीन का प्रयोग करने का मामला आया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम ने निगरानी के दौरान मिली इस स्थिति के बारे में अधिकारियों को जानकारी दी है। इसके बाद अब कार्रवाई शुरू हो गई है।

नगरीय क्षेत्र में छह नवंबर को शहरी स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर अरुणा आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों का टीकाकरण करने के लिए सत्र आयोजित किया गया था। यहां पर बच्चों व गर्भवती को विभिन्न बीमारियों से बचाने का टीका लगाया जा रहा था। जांच के लिए पहुंची टीम ने जब देखा तो पाया गया कि, जिस पोलियोरोधी वैक्सीन का प्रयोग किया जा रहा था, वह एक्सपायर्ड था। फिलहाल, टीम ने इसके प्रयोग पर रोक लगा दी। अधिकारियों को इसकी जानकारी दी है। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. देवराज ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है, कितने बच्चों को इसका डोज दिया गया। इसके बारे में जानकारी की जा रही है। वैसे, आइपीवी वैक्सीन को खुलने के 28 दिन के भीतर उपयोग कर लिया जाना चाहिए। इनसेट

क्या है आइपीवी वैक्सीन

- डेढ़ साल तक के बच्चों को पोलियो से बचाने के लिए इंजेक्टेबल पोलियो वैक्सीन (आइपीवी) दी जा रही है। अलग-अलग उम्र में कई डोज दी जाती है। यह नियमित टीकाकरण में शामिल है। इसकी निगरानी भी की जाती है।

हो रही कार्रवाई

- सीएमओ डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि मामला संज्ञान में है। एएनएम गोल्डी सिंह व सुपरवाइजर प्रदीप कुमार शुक्ल से स्पष्टीकरण मांगा गया है। महिला अस्पताल के सीएमएस से कोल्डचेन प्वॉइंट के बाबत रिपोर्ट देने को कहा गया है।

Posted By: Jagran

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