गोंडा: प्रकाश पर्व की तैयारियां चल रही हैं। बाजार भी तैयार हो रहे हैं। मिलावटी खाद्य सामग्रियों के साथ ही नामी ब्रांड को भुनाने में उपभोक्ता पिस रहे हैं। दुकानदार उन्हें सस्ते का लालच दे रहे हैं। थोड़े से फायदे के लिए उपभोक्ता बाजार से मिलावटी सामान ला रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो अगर सही खोवा लिया जाय तो दो सौ से अधिक उसकी कीमत प्रतिकिलो होगी लेकिन, बाहर से आने वाले खोवा को 150 से 200 रुपये के बीच बाजार में खपाया जा रहा है। जैसे-जैसे डिमांड बढ़ती है, उसी तरह से बाहर से खोवे की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में वह कम दामों में लोगों को उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले साल दीपावली पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने कुल 18 नमूने लिए थे। जिसमें से 11 नमूने फेल हुए हैं। एक बेसन व मिठाई के छह नमूने फेल हुए हैं। किस तरह से हो रही मिलावट: दूध में पानी मिलाने की शिकायतें आम हैं। इसमें स्टार्च भी मिलाया जा रहा है। इसे दूध को गाढ़ा करने के लिए मिलाया जाता है। स्टार्च में सिघाड़े का आटा, अरारोट आदि सामग्री आती है। खोवा व पनीर में भी दूध के पाउडर का इस्तेमाल होता है। इसके अतिरिक्त बाजार में एक ही नाम से कई ब्रांड के सामान बिक रहे हैं। जिससे उपभोक्ता भी ऊहाफोह में फंस जा रहे हैं। दूध से क्रीम निकालने का भी कारोबार फल फूल रहा है। क्या कहते हैं जिम्मेदार: अभिहित अधिकारी विनय सहाय का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। कई स्तर पर कार्रवाई हो रही है। टीमें गठित है। छापेमारी की जा रही है। आम लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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