गोंडा: शहर में बिजली आपूर्ति 24 घंटे किए जाने का दावा हवाई साबित हो रहा है। अधिकारियों व कर्मियों की कार्यशैली से शासन की मंशा परवान नहीं चढ़ पा रही है। मंगलवार को झंझरी फीडर से आपूर्ति बाधित रही। जिससे करीब दस हजार से अधिक लोग अंधेरे में रहे। इस दौरान कर्मियों ने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।

मंगलवार को अपराह्न दो बजे अचानक बिजली गुल हो गई। उपभोक्ताओं के फोन घनघनाने लगे। लेकिन झंझरी उपकेंद्र पर फोन रिसीव नहीं हुआ। उधर, अभियंता संविदा कर्मियों का इंतजार करते रहे। वहीं संविदा कर्मी रजिस्ट्रेशन कराने को लेकर फार्म भरने में मशगूल दिखे। इससे साढ़े चार बजे तक आपूर्ति नहीं बहाल हो सकी। फीडर पर उपलब्ध दूसरे सीयूजी नंबर पर लाइट ऊपर से काटने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया गया। एक कर्मचारी की मानें तो गड़बड़ी स्थानीय स्तर पर थी। लेकिन उसे सही कराने के बजाए ऊपर से कटौती किए जाने की बात कहकर लोगों को गुमराह किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में भी कमोबेश ऐसी ही स्थिति बनी हुई है। जिससे किसानों की फसलों को पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों की मानें तो लाइनों की मरम्मत में पांच से छह दिन लगाया जाता है। जबकि शासन ने 72 घंटे में ट्रांसफार्मर बदलने व लाइन फाल्ट को तत्काल ठीक करने का निर्देश दे रखा है। बावजूद इसके अधिकारी गंभीर नहीं हैं। इससे शासन की मंशा परवान नहीं चढ़ पा रही है। अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड प्रथम अशोक कुमार यादव का कहना है कि लाइन फाल्ट की वजह से ढाई घंटे लाइट न रहना गलत है। संबंधित अवर अभियंता से जवाब मांगा जाएगा।