जासं, मरदह (गाजीपुर) : क्षेत्र के पृथ्वीपुर में कोटे की दुकान के चयन के लिए गुरुवार को आयोजित खुली बैठक हंगामे की भेंट चढ़ गई। अचानक सभी चुनाव अधिकारियों के मौके से भाग जाने से आक्रोशित सैकड़ों ग्रामीणों ने सचिव गोपाल सिंह को बंधक बना दिया। इसकी सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के हाथ-पांच फूलने लगे। कुछ देर बाद ही मरदह थानाध्यक्ष भारी पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों को समझा बुझाकर रात में कोटे की दुकान के चयन का भरोसा दिया, तब जाकर ग्रामीणों ने सचिव को छोड़ा।

कोटे की दुकान के चुनाव के लिए बीरबल जूनियर हाईस्कूल परिसर में सैकड़ों की तादात में ग्रामीण जुटे थे। जिनमें दो दावेदार नीलम पत्नी पन्नालाल और मंजू पत्नी शिवदास आमने-सामने थे। चुनाव सम्पन्न करने के समय नीलम पत्नी पन्नालाल की तरफ से संख्या बल कम होने के कारण अपने समर्थकों के साथ विद्यालय से चली गई। इसके बाद चुनाव अधिकारी बनाए गए सप्लाई इंस्पेक्टर, एडीओ एसबी अनिल मौर्या भी बाहर चले गए। इससे चुनाव सम्पन्न नहीं होने के कारण ग्रामीण आक्रोशित हो गए। ग्राम पंचायत सचिव गोपाल सिंह को बंधक बना लिया और साजिश रचने का आरोप लगाते हुए नारेबाजी करने लगे। ग्रामीणों ने मौके पर ही प्रस्ताव रजिस्टर पर ग्राम पंचायत सचिव से संख्या बल में अधिक मंजू पत्नी शिवदास को कोटेदार चुने जाने का प्रस्ताव लिखवा लिए। इनके समर्थन में करीब 750 ग्रामीण थे। प्रस्ताव पर चुनाव अधिकारियों को बुलाकर हस्ताक्षर कराने की जिद पर देर शाम तक अड़े रहे। अंधेरा होने और ग्रामीणों द्वारा बार-बार हो हल्ला मचाने पर सचिव ने विभागीय उच्चाधिकारियों से मोबाइल पर वार्ता करके रात में ही हस्ताक्षर कर चयन कराने का आश्वासन दिया। वहीं मरदह थाना प्रभारी शरतचंद्र त्रिपाठी सचिव एवं कोटेदार के दावेदार के तरफ के तीन लोगों को एक ही वाहन में बैठाकर गाजीपुर रवाना करने पर भीड़ शांत हुई।

Posted By: Jagran

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