जागरण संवाददाता, गाजीपुर : गंगा में मिले शवों को लेकर सतर्क जिला प्रशासन ने अंत्येष्ठि स्थलों की वीडियोग्राफी का निर्णय किया है। जिले के सभी अंत्येष्ठि स्थल चिन्हित कर वहां की वीडियोग्राफी इस मकसद से कराई जाएगी कि वहां की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। कुछ जगहों पर इसका ट्रायल हुआ तो गुरुवार से बकायदा यह हर जगह अस्तित्व में आ जाएगा।

जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने कहा कि घाट पर लकड़ियों की कमी नहीं है। आह्वान किया कि दाह संस्कार के लिए आएं और शवों को अभाव के नाम पर जलप्रवाह न करें। अगर कोई आर्थिक रूप से अक्षम है तो हमसे कहें। हम दाह संस्कार का भी खर्च उठाएंगे। कहीं किसी को शव ले जाने के लिए वाहन की जरूरत है तो कंट्रोल रूम पर फोन करे, मुझे बताए। तुरंत मदद होगी। कहीं शव को लाने में कोई दिक्कत हो, कोई किसी तरह की मांग कर रहा हो या फिर कुछ और बात हो तो जरूर बताएं, जिला प्रशासन पूरी तरह मदद को तैयार है। उधर, इन स्थलों पर लेखपालों आदि की टीम लगा दी गई है। वह निगरानी कर रिपोर्ट देते रहेंगे।

जिलाधिकारी ने अंत्येष्ठि के लिए अधिकतम 650 रुपये प्रति क्विटल की दर निर्धारित की है। साफ कहा कि इससे कहीं कोई एक रुपये भी अधिक लेता है तो तत्काल कंट्रोल रूम के नंबर पर फोन करें। फौरी तौर पर कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि अंत्येष्ठि के लिए लकड़ी के मनमाने कीमत की तमाम शिकायतें आ रहीं थीं। इसी क्रम में डीएम ने यह कदम उठाया है।

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सुधार तो हुआ, पर परंपरा ने बिगाड़ी गंगा की सेहत

जागरण संवाददाता, भदौरा (गाजीपुर) : परंपरा ने मोझदायिनी गंगा की सेहत को खराब कर दिया है। यूपी के बड़े गांवों में शुमार गहमर व शेरपुर में कुछ लोग मोक्ष प्राप्ति के लिए शवों का गंगा में जल प्रवाह करते हैं। हालांकि नमामि गंगे योजना जब से आई है, इसमें बहुत हद तक सुधार भी हुआ है। गत पांच सालों में लोगों में जागरूकता भी आई, लेकिन पिछले तीन दिनों से जिस प्रकार जिला सहित बिहार में अधिक संख्या में गंगा में तैरते शव मिले उससे हलचल मची हुई है।

कोरोना काल में गहमर, बारा से लेकर जिले से सटी बिहार की सीमा पर चौसा के महर्षि च्यवन स्थल व मुक्तिधाम के बीच गत दिनों काफी संख्या में गंगा के तट पर शव मिले थे। इसमें से कुछ तीन-चार दिनों पूर्व के और कुछ हाल-फिलहाल के मालूम पड़ रहे थे। मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने फौरी कदम उठाए। लाख जागरूकता के बाद अभी भी कई गांवों में दशकों से शवों के जल प्रवाह करने की परंपरा का बदस्तूर निर्वहन किया जाता रहा है। आश्चर्य की बात तो यह है कि इसमें प्रशासन कोई विशेष ध्यान नहीं देता था। बताया यह भी जा रहा है कि कुछ शवों का जल प्रवाह इसलिए भी किया जाता है क्योंकि कमजोर वर्ग के लोग जलावन की लकड़ी आदि का खर्च नहीं उठा पाते। शेरपुर के दीपक ने बताया कि गांवों में जलप्रवाह की परंपरा रही है। बड़े बुजुर्ग व पूर्वज की मांग रहती है कि मेरी मृत्यु के बाद मेरे शव को जल प्रवाह कर देना जिससे मुझे मोक्ष प्राप्त हो जाए।

भदौरा प्रखंड के पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनीष सिंह उर्फ बिट्टू ने बताया कि यूपी-बिहार के लगभग 40 गांव के लोग शवदाह के लिए गहमर आते हैं। लकड़ियां महंगी होने से अधिकांश लोग शवों को गंगा में प्रवाहित करते हैं। ऐसे में लोगों द्वारा विद्युत शवदाह गृह की मांग उठाई जा रही है।

--- गहमर में दो विद्युत शवदाह गृह प्रस्तावित है। कोविड-19 कि चलते कार्य शुरू नहीं हो सका। जल्द ही इसका निर्माण कार्य शुरू होगा।

सुनीता सिंह, विधायक जमानियां।

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श्मशान घाट पर डीएम ने चस्पा कराए कर्मियों व लिपिक के नंबर जागरण संवाददाता, सैदपुर (गाजीपुर) : स्थानीय नगर के जौहरगंज स्थित श्मशान घाट का निरीक्षण बुधवार को जिलाधिकारी मंगला प्रसाद व पुलिस अधीक्षक डा. ओमप्रकाश सिंह ने किया। इस दौरान उन्होंने घाट पर जल रहे शवों के बाबत पूरी जानकारी ली। लकड़ियों का 650 रुपये प्रति क्विटल दर निर्धारित करते हुए निर्देश दिया कि इससे अधिक कीमत लिया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

वहां मौजूद नगर पंचायत के अधिशासी डा. संतोष मिश्र को निर्देश दिया कि वह घाट पर नजर बनाए रखें। डीएम ने नगर पंचायत द्वारा घाट पर ही नगर पंचायत के कई कर्मियों व लिपिक के नंबर भी चस्पा कराए। कहा कि ये वक्त आपदा का है तो हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इससे मिलकर लड़ें। उन्होंने घाट पर आने वालों से भी गाइडलाइन का पालन कराने व मास्क लगवाने का निर्देश दिया। एसडीएम विक्रम सिंह, क्षेत्राधिकारी बीएस वीर कुमार, कोतवाल राजीव सिंह, एसएसआई घनानंद त्रिपाठी, चौकी इंचार्ज हरिप्रकाश यादव आदि रहे।

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तीसरे दिन गंगा में कहीं नहीं मिला शव

जागरण संवाददाता, गाजीपुर : दो दिन तक जहां गंगा में शवों के मिलने से हाहाकार की नौबत थी वहीं तीसरे दिन बुधवार को जिले में कहीं एक भी शव न मिलने से जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। उधर, गठित टीमें सक्रिय रहीं। वह गंगा के किनारे आने-जाने वालों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं। इस संबंध में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि बुधवार की शाम तक गंगा में कहीं कोई शव नहीं मिला।