जासं, खानपुर (गाजीपुर) : नियति कितनी क्रूर हो सकती है इसे देखा बभनौली गांव के लोगों ने। यहां के निवासी जयप्रकाश पांडेय के साथ जो खेल विधना ने खेला उसका जख्म ताउम्र न भर पाएगा। बरक्षा के एक दिन पहले ही बड़े बेटे प्रिस व छोटे भाई सत्यप्रकाश की मौत से दुखों का पहाड़ टूट गया। घर में आए मेहमान भी अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे। हंसी-खुशी का दौर मातम में बदल गया था।

बभनौली निवासी जयप्रकाश पांडेय सैदपुर तहसील में मुहर्रिर के पद पर तैनात हैं। दो पुत्र व दो पुत्रियों में सबसे बड़े बेटे की शादी 10 जून में जौनपुर जनपद में तय थी, जबकि मंगलवार को बरक्षा था। बरक्षा के पूर्व ही प्रिस ने कैथी स्थित मारकंडेय महादेव व विध्याचल धाम दर्शन पूजन की इच्छा जाहिर की। चूंकि मामला दर्शन-पूजन से जुड़ा था ऐसे में पिता जयप्रकाश इसे ठुकरा न सके। प्रिस अपने चाचा सत्यप्रकाश पांडेय (48) व सत्यप्रकाश के पुत्र सजल (20) को लेकर खुद की स्कार्पियो से सोमवार की शाम रवाना हो गए। मारकंडेय महादेव दर्शन के बाद विध्याचल धाम के लिए निकल लिए। मिर्जामुराद क्षेत्र में पहुंचे थे कि स्कार्पियो ट्रक में पीछे से घुस गई। इससे चाचा-भतीजे की मौत हो गई, जबकि सजल गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसका उपचार वाराणसी के ट्रामा सेंटर में चल रहा है। ---

घर आ गए थे मेहमान

बभनौली गांव निवासी जयप्रकाश पांडेय का भरापूरा परिवार है। वह पांच भाई थे। सबसे बड़े ओमप्रकाश पांडेय, दूसरे नंबर पर जयप्रकाश, तीसरे पर बेदप्रकाश प्रकाश, चौथे मनोज व सबसे छोटे सत्यप्रकाश थे। सभी लोग एक साथ ही रहते थे। सभी की इच्छा थी कि प्रिस की शादी धूमधाम से की जाए, मगर ईश्वर को तो कुछ और ही मंजूर था। ---

मां-पिता का रो-रोकर बुरा हाल

बेटे प्रिस की मौत से मां नीलम व पिता सत्यप्रकाश का रो-रोकर बुरा हाल है। घर में आए मेहमान भी अपने आंसू नहीं रोक पा रहे हैं। मंगलवार की सुबह से ही लोग परिवार को ढांढस बंधा रहे थे। ---

दो पुत्रों को छोड़ गए सत्यप्रकाश

दुर्घटना का शिकार हुए सत्यप्रकाश घर पर ही रहकर व्यापार करते थे। इनके दो पुत्र संजय व सजल हैं। संजय बड़ा है। पिता की मौत से संजय व उसकी मां प्रतिमा का रो-रोकर बुरा हाल है।

Posted By: Jagran