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गाजीपुर में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के हाथों उदघाटन के घंटों बाद बंद मिला सीटी स्कैन कक्ष का ताला

By Suryakant TripathiEdited By: Abhishek sharma
Published: Tue, 29 Sep 2026 11:34 AM (IST)

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा गाजीपुर मेडिकल कॉलेज में उद्घाटन की गई सीटी स्कैन मशीन का कक्ष सोमवार को ताला लगा ...और पढ़ें

गाजीपुर में डिप्टी सीएम के उद्घाटन के बाद भी बंद पड़ी सीटी स्कैन मशीन, मरीजों को इंतजार।

गाजीपुर में डिप्टी सीएम के उद्घाटन के बाद भी बंद पड़ी सीटी स्कैन मशीन, मरीजों को इंतजार।

HighLights

  1. डिप्टी सीएम ने गाजीपुर में सीटी स्कैन मशीन का उद्घाटन किया।

  2. उद्घाटन के बाद भी मशीन का कक्ष ताला लगा मिला।

  3. प्राचार्य ने 3-4 दिनों में मशीन चालू होने का आश्वासन दिया।

जागरण संवाददाता, गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में शनिवार को उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने जिस सीटी स्कैन मशीन का फीता काटकर शुभारंभ किया था, उस कक्ष में सोमवार को ताला लटका मिला। डिप्टी सीएम के हाथों उदघाटन के लिए डेढ़ साल से इंतजार कर रही सीटी स्कैन मशीन से कब मरीजों को लाभ मिलेगा यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।

यह मशीन जब से लगी है, तब से आज तक चालू नहीं हुई। ऐसे में बिना इंजीनियर के यह चालू नहीं हो सकती है। शनिवार को मेडिकल कालेज पहुंचे उपमुख्यमंत्री ने सीटी स्कैन के साथ ही माड्यूलर ओटी कांप्लेक्स और अमृत फार्मेसी का भी लोकार्पण किया था। मशीन का मामला पहले ही विधानसभा तक पहुंच चुका है।

सोमवार को दैनिक जागरण की पड़ताल पुरानी बिल्डिंग के प्रथम तल पर लगाई गई इस मशीन का कक्ष पर ताला लटका मिला। ऐसे में उदघाटन के बाद एक भी मरीज का सीटी स्कैन नहीं होना बताया गया है। मशीन चालू होती तो काफी संख्या में मरीजों को लाभ मिलता। हायर क्वालिटी की इस मशीन से प्रतिदिन एक सौ मरीजों का सीटी स्कैन संभव है। दूसरी मशीन से प्रतिदिन 80 मरीजों का सीटी स्कैन होता है।

एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने सदन में उठाया था मुद्दा, डिप्टी सीएम ने बताया था खराब

एमएलसी आशुतोष सिन्हा ने सदन में गाजीपुर मेडिकल कालेज में करीब दो वर्ष से रखी सीटी स्कैन मशीन का मुद्दा उठाते हुए कहा था कि मशीन स्थापित होने के बावजूद तकनीकी स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया और उसका उपयोग नहीं हो रहा है। यह भी बताया था कि अस्पताल में एक अन्य संस्था के माध्यम से संचालित सीटी स्कैन मशीन का उपयोग हो रहा है जबकि सरकारी मशीन बंद पड़ी है।

जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा था कि बंद मशीन खराब है और उसे ठीक कराने में अधिक खर्च आएगा। उन्होंने बताया था कि बाहर से पुर्जे मंगाने में समय लगता है, इसलिए पीपीपी माडल को प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना था कि पीपीपी के तहत संचालित मशीन में मरीज से शुल्क नहीं लिया जाता।

बोले प्राचार्य

राजकीय मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डा. आनंद मिश्रा का कहना है कि नए सीटी स्कैन मशीन को लेकर इंजीनियर को काल कर बुलाया गया है। मशीन की मामूली तकनीकी कमी को ठीक कर और स्टाफ को प्रशिक्षित कर इसे आगामी तीन से चार दिनों में शुरू कर दिया जाएगा। जांच शुल्क को लेकर फिलहाल शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है।

हमारा प्रयास है कि मरीजों के लिए यह सेवा निश्शुल्क ही रहे। यह मशीन नीचे लगी एचएलएल मशीन की तुलना में उच्च श्रेणी की है। चूंकि यह मेडिकल कालेज की अपनी मशीन है । इसलिए इसे रात में भी संचालित किया जाएगा ताकि मरीजों को 24 घंटे निर्बाध सीटी स्कैन की सुविधा मिल सके।

जहां तक मेडिको-लीगल का सवाल है मेडिकल कालेज में अभी कोई स्थायी रेडियोलाजिस्ट तैनात नहीं है।जांच की रिपोर्टिंग बाहर से करवाई जाएगी जिस पर 'नाट फार मेडिको-लीगल पर्पस' दर्ज रहता है। इसलिए जब तक स्थायी रेडियोलाजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक इसकी रिपोर्ट मेडिको-लीगल मामलों में मान्य नहीं होगी।