जासं, लौवाडीह (गाजीपुर) : मगई नदी के बहाव में अवरोध करने वाले कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर भले ही प्रशासनिक अधिकारियों ने कोरम पूरा कर दिया हो लेकिन अभी भी अवरोध पूरी तरह से नहीं हट पाया है। इसके चलते नदी के पानी का घटाव बहुत ही मामूली हो रहा है। पानी अभी भी खेतों में जस का तस जमा है। धान की फसल बर्बाद तो हो ही चुकी है, अब रबी की बोआई में भी काफी विलंब होने का अंदेशा बरकरार है। कहीं-कहीं तो अब रबी की बोआई भी संभव नहीं हो पाएगी। किसान इसे अवैध रूप से मछली का कारोबार करने वालें की कारस्तानी बता रहे हैं।

पिछले हफ्ते प्रशासनिक अधिकारियों ने महेंद, जगदीशपुर आदि गांव के पास मंगई नदी में लगे जाल को हटवा दिया था लेकिन बलिया जनपद में पड़ने वाले दौलतपुर के पास अभी भी काफी जाल लगा है। दौलतपुर बलिया जिला में पड़ता है। इसलिए यहां के प्रशासनिक अधिकारी अपना पल्ला झाड़ रहे है। किसानों का कहना है कि मगई नदी से अवैध ढंग से मछली मारने का कारोबार करने में काफी प्रभावशाली लोगों का हाथ है। इसके चलते प्रशासनिक अधिकारी भी कार्रवाई में तेजी नहीं दिखा पा रहे हैं। नदी का प्रवाह रोकने से लौवाडीह, जोगामुसाहिब, पारो, रेड़मार, देवरिया, मसौनी, गोंड़उर, लठ्ठूडीह, करीमुद्दीनपुर, परसा, राजापुर, खेमपुर, सिलाईच, रघुवरगंज आदि गांवों के सिवान में पानी जमा होकर धान बाजरा और सब्जी की फसलों को नष्ट कर दिया है। नदी के प्रवाह में लगाए गए अवरोधों को हटवाने के लिए किसानों ने नवागत जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट कराया है।

नुकसान का नहीं कराया जा रहा सर्वे

लौवाडीह : प्रशासनिक अधिकारियों और कृषि विभाग द्वारा मंगई नदी द्वारा नष्ट हुए फसलों का सर्वे भी नहीं कराया जा रहा है। इससे किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी नहीं मिल पायेगा। कई वर्ष मगई नदी के पानी से फसल नष्ट हो गयी लेकिन कभी भी किसान इसका लाभ नहीं उठा पाये। प्रति वर्ष किसान क्रेडिट कार्ड से बीमा के लिए निश्चित रकम काट ली जाती है लेकिन जब किसानों की फसल नष्ट हो जाती है तो बीमा, कृषि और प्रशासनिक विभाग के सर्वे के नाम पर बीमा का लाभ उलझकर रह जाता है।

Posted By: Jagran

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