यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 08, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
रक्षा सूत्र बांध लिया वृक्षों को बचाने का संकल्प
जागरण संवाददाता, मुहम्मदाबाद (गाजीपुर) : दैनिक जागरण के अभियान से प्रेरित होकर शुक्रवार

जागरण संवाददाता, मुहम्मदाबाद (गाजीपुर) : दैनिक जागरण के अभियान से प्रेरित होकर शुक्रवार को बलिया लोकसभा युवा कांग्रेस के अध्यक्ष जयप्रकाश यादव के नेतृत्व में हरिबल्लमपुर गांव में वट वृक्ष के पास एकत्रित होकर युवकों ने वृक्ष बचाने व उनकी रक्षा का संकल्प लिया। इस मौके पर युवक वट वृक्ष में जीवनदाता लिखा तख्ती लगाने के पश्चात रक्षा सूत्र बांधकर वृक्षों की सुरक्षा व रख रखाव का संकल्प लिया। इस मौके पर श्री यादव ने कहा कि आज हम मौसम के उतार चढ़ाव को लेकर पूरी तरह से ¨चतित है। इसका मुख्य कारण है पृथ्वी से तेजी से पेड़ पौधों का समाप्त होना। हम पेड़ों की अंधाधुंध कटाई तो करते जा रहे हैं लेकिन पौधों को लगाने में रूचि नहीं ले रहे हैं। अगर मानव जीवन को सुरक्षित रखना है तो हमें आज ही संकल्प लेना होगा प्रत्येक व्यक्ति कम से कम दो पौधों को लगाए और उसकी सुरक्षा करे। तभी पृथ्वी पर हरियाली होगी और उसका लाभ हमें मिलेगा। इस मौके पर अशोक चौधरी, हलचल तिवारी, सोहन प्रजापति, हीरा चौधरी, श्रीनारायण चौधरी, दिनेश यादव, मुरारी चौधरी, गोपाल चौधरी, दीपक गुप्ता, अनिल चौधरी, शरीफ चंद चौधरी, लालबाबू चौधरी, दिनेश तिवारी आदि मौजूद रहे। सैकड़ों वर्ष पुराने वट वृक्ष के नीचे पूरे दिन जमे रहते हैं ग्रामीण
मुहम्मदाबाद : एनएच 31 से नवापुरा मोड़ जाने वाले संपर्क मार्ग के किनारे हरिवल्लमपुर गांव के पास स्थित वट वृक्ष लोगों को काफी सुकुन प्रदान करता है। ग्रामीणों की सुबह, दोपहर व शाम को पेड़ के नीचे तो समय कटता ही है अधिकतर लोग गर्मी में सुकून भरी नींद पाने के लिए वट वृक्ष के इर्द गिर्द बनाए गए चबूतरे पर सोते हैं। सैकड़ों वर्ष पुराने वट वृक्ष के आयु का कोई सही आंकलन नहीं कर पाता। गांव के वृद्ध शिवनारायण चौधरी और गंगा सागर यादव ने बताया कि उनकी उम्र अब धीरे धीरे शतक की ओर बढ़ रहा है लेकिन यह वट वृक्ष उनके बचपन में भी इसी तरह का था। उनके पिताजी भी बताते थे कि यह वृक्ष काफी पुराना है। वट वृक्ष का तो वैसे भी पौराणिक महत्व है लेकिन यहां पर भगवान शंकर का मंदिर भी लोगों के आस्था का केंद्र है। मंदिर पर सुबह शाम दर्शन पूजन व आरती में लोगों की भीड़ जमा होती है। वट वृक्ष के चारों ओर ग्रामीणों के प्रयास से काफी आकर्षक चबूतरे का निमरण कराया गया है। गर्मी में सड़क से गुजर रहे राहगीर भी ताप से बचने के लिए वट वृक्ष के नीचे चबूतरे पर बैठकर अपनी दोपहरी बिताकर आगे बढ़ते हैं। ग्रामीणों में मान्यता है यह वटवृक्ष उनके जीवन को चलाने के लिए आक्सीजन तो प्रदान करता ही है गांव की सुरक्षा भी इससे हैं। ---
पांच हजार पौधों का रोपण कर चुके हैं रामाश्रय
भांवरकोल: कुछ लोग पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक मानते हुए भी पेड़-पौधों को लगाने तथा उनकी देखरेख के प्रति समर्पित दिखाई पड़ते हैं। ऐसे ही एक पर्यावरण प्रेमी हैं शेरपुर ग्राम पंचायत के वार्ड नंबर एक धर्मपुरा निवासी रामाश्रय उपाध्याय। श्री उपाध्याय का पेड़पौधों को लगाने उनकी देखरेख करने में काफी आनंद की अनुभूति होती है। श्री उपाध्याय गांव पर लगभग पांच हजार पेड़ पौधे लगाये थे लेकिन बाढ़ से अधिकांश पौधे नष्ट हो गये फिर भी एक डेढ़ हजार पौधे अब भी जीवित हैं। बताया कि आधुनिकता के दौर में आज सभी प्रकार का प्रदूषण बहुत तेजी से फैल रहा है। जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। धर्म ग्रन्थों में भी पेड़ पौधे लगाना एक पुनीत कार्य है। पर्यावरण संतुलन को बनाये रखने के लिए पेड़पौधों को लगाना उनकी देखभाल करना आवश्यक है। श्री उपाध्याय को पौधरोपण की प्रेरणा धर्म ग्रन्थों के पढ़ने व सत्संग में भाग लेने तथा प्रवचन सुनने से मिली है।
