जागरण संवाददाता, गाजीपुर : गुनाहों से तौबा और मगफिरत (माफी) की रात शब - ए - बरात का पर्व गुरुवार को मनाया जाएगा। इसकी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण एवं लॉकडाउन को देखते हुए लोग कब्रिस्तान जाने के बजाय इस बार घरों में ही रहकर पूरी रात इबादत करेंगे। यह एलान भी किया जा रहा है कि शब-ए-बरात के दिन घर से बाहर निकलें न किसी तरह की आतिशबाजी कर खुशी का इजहार करें। 

बारा : इस्लामिक कैलेंडर के शाबान माह की 14 तारीख को शब-ए-बरात मनाया जाता है। शब-ए-बरात का अर्थ छुटकारे की रात से है। यह रात इबादत की रात है और गुनाहों से माफी मांगी जाती है। बहुत से लोग इस दिन रोजा भी रखते हैं। इस दिन उन लोगों के लिए भी दुआ मांगी जाती है जो दुनिया से विदा हो चुके हैं। उनके नाम पर गरीबों को खाना खिलाया जाता है। घरों में आमतौर पर चने की दाल या सूजी का हलवा बनता है, जिसे बांटा जाता है। इस बार हालात को देखते हुए उलेमाओं ने मस्जिद और कब्रिस्तान जाने से परहेज करने की अपील की है।

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पटाखे न फोड़ने की अपील

नासमझी में बहुत से लड़के पटाखे फोड़ते हैं। मौलाना कलीमुद्दीन शम्सी ने युवाओं से ऐसे कामों से दूरी बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस मुबारक दिन का ज्यादा समय इबादत और गुनाहों से तौबा करने में लगाएं। 

Posted By: Jagran

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