जासं, गाजीपुर : अब गुलाबी व ब्लू आयरन की गोली रक्ताल्पता (एनीमिया) को समाप्त करेगी। साथ ही खून की कमी से होने वाली मौतों पर भी काफी हद तक अकुंश लग सकेगा। इसके लिए स्वास्थ्य ने आइसीडीएस व बेसिक शिक्षा विभाग के साथ मिलकर तैयारी शुरू कर दी है। गुरुवार को सीएमओ कार्यालय परिसर में सीएचसी-पीएचसी के चिकित्सा प्रभारियों को किशोरावस्था में होने वाली बीमारी व बचाव की जानकारी देने के साथ उन्हें प्रशिक्षित भी किया गया।

खून की कमी एक ऐसी समस्या है जो शारीरिक व मानसिक क्षमता को काफी प्रभावित करती है। खासकर किशोरावस्था में इसका प्रभाव अधिक पड़ता है। वजह इस दौरान शारीरिक व मानसिक विकास और परिवर्तन तेजी से होता है। जनपद में 10 से 17 वर्ष की करीब 95. 8 प्रतिशत किशोरियों में खून की कमी है। यहीं नहीं एक वर्ष के अंदर इस समस्या से करीब 30 प्रतिशत लोगों की मौत भी हो जाती है। इसकी रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने महिला बाल विकास विभाग (आइसीडीएस) एवं शिक्षा विभाग के साथ मिलकर जीवन चक्र आधारित रणनीति अपनाई है। इसमें सभी वर्गों को शामिल करने के साथ आयरन की गोली वितरित करने के साथ खिलाने की जिम्मेदारी भी तय की गई है। ----------

शिक्षक अपनी निगरानी में कराएंगे सेवन

सरकारी व सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को आयु वर्ग के मुताबिक प्रति सप्ताह सोमवार को आयरन की गोली का सेवन शिक्षक अपनी निगरानी में कराएंगे। पांच से दस वर्ष के बच्चों को आयरन की गुलाबी व दस वर्ष से 19 वर्ष तक को नीली गोली दी जाएगी। इसके अलावा छह माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को खुराक के मुताबिक दवा दी जाएगी। ------------

एनीमिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सरकारी व सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को आयरन की गोलियों का वितरण किया जाएगा। उन्हें खिलाने की जिम्मेदारी शिक्षकों को दी गई। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपने क्षेत्र में स्कूल नहीं जाने वाले किशोरियों की सूची तैयार करने साथ शिड्यूल के मुताबिक दवा खिलाएंगे।

- डा. केके वर्मा, एसीएमओ

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