जासं, गाजीपुर : अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी आयुष्मान भव कहेंगे। कहने को लाभार्थियों को आसानी से जहां तत्काल प्राथमिक उपचार मिलेगा वहीं गंभीर होने पर प्राथमिकता के तौर पर एंबुलेंस से संबद्ध निजी अस्पताल रेफर भी किया जाएगा लेकिन ऐसा हो सकेगा इसमें संदेह है। बहरहाल, जनपद के 13 सीएचसी को योजना से जोड़ने के लिए जल्द ही कवायद शुरू होगी। शासन की ओर से मिले निर्देश के बाद वहां सुविधा बढ़ाने के साथ खामियों को भी दूर करने की प्रक्रिया स्वास्थ्य विभाग की ओर से तेज करने के दावे किए जा रहे हैं।

आयुष्मान योजना के सकुशल एक वर्ष पूर्ण होने के बाद अब शासन ने योजना का धीरे-धीरे विस्तार करना शुरू कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को उपचार के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े। वर्तमान समय में योजना के पात्र मरीजों को जानकारी नहीं होने पर उन्हें सीएमओ कार्यालय व सरकारी अस्पतालों का चक्कर काटना पड़ता है। ऐसी स्थिति में तत्काल उपचार न मिलने की स्थिति में तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यही नहीं आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों तक पहुंचने के लिए उन्हें आवागमन के नाम पर हजारों रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में लाभार्थियों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के जुड़ जाने से अब लाभार्थी को जहां चिकित्सकीय सुविधा का लाभ मिलेगा। वहीं गंभीर स्थिति होने पर एंबुलेंस के जरिए वहां के डाक्टर सीधे उन अस्पतालों को रेफर करेंगे। जहां उनका समुचित इलाज हो सके।

उठानी पड़ती है दिक्कत

लाभार्थी सीधे तौर पर जब जनपद व अन्य जगहों पर योजना से संबद्ध निजी अस्पतालों में पहुंचता है तो उन्हें तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वहां के चिकित्सकों द्वारा जहां पुन: जांच कराने के साथ उपचार शुरू किया जाता है। अब सीएचसी से रेफर होने के बाद संबद्ध निजी अस्पताल के चिकित्सक डाक्टरों द्वारा दिए गए परामर्श के आधार पर लाभार्थी मरीज का इलाज शुरू कर देंगे। साथ ही जरूरत के मुताबिक ही जांच भी करा सकेंगे। साथ ही लाभार्थियों को यह भी लाभ होगा की रेफर होने के बाद निजी वाहनों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। वजह एंबुलेंस द्वारा ही लाभार्थियों को सीएचसी से संबद्ध अस्पताल तक पहुंचाया जाएगा। --------

जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को योजना से जोड़ने की कवायद शुरू हो चुकी है। इसके लिए सूची व फाइलों को तेजी से तैयार किया जा रहा है। अब लाभार्थी मरीज को उपचार के लिए इधर-भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

- डा. जितेंद्र दुबे, जिला प्रोग्राम कोआर्डिनेटर आयुष्मान।

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