जासं, दिलदारनगर (गाजीपुर) : नगर के रामलीला मैदान में शनिवार की रात कवियों ने रचनाओं के माध्यम से नारी, गरीबी, पर्यावरण, आतंकवाद, सामाजिकता पर प्रहार कर सभी को सोचने पर विवश किया। मौका था सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच उद्भव की ओर से भोजपुरी फिल्मों के जनक नाजिर हुसैन की स्मृति में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का। समिति ने शेर खां उर्फ अहकर गाजीपुरी तथा नाजिर हुसैन के पुत्र मुमताज हुसैन को अंगवस्त्रम व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कवि आनंद कुशवाहा की 'आनंद वाटिका' पुस्तक का लोकार्पण किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ कवियित्री विभा सिंह ने मां सरस्वती की वंदना से किया। हास्य कवि सुरेंद्र सोटा ने कविता के माध्यम से वर्तमान व्यवस्था और राजनीति पर प्रहार किया। आजमगढ़ से आए कवि अहमद आजमी ने 'जमीन मेरी गगन मेरा यह फूलों का चमन मेरा, जहां सब मिलकर रहते हैं वहीं तो यह वतन मेरा' सुनाकर आपसी सौहार्द को मजबूत बनाने का संदेश दिया। देवरिया से आए हास्य व्यंग्य के कवि बादशाह प्रेमी ने कविता के माध्यम से मोबाइल पर तंज कसा। भोजपुरी गीतकार डा. कमलेश राय ने कविता के माध्यम से व्यवस्था पर चोट किया। कविता के माध्यम से मजदूर के लड़के और नारी के जीवन का चित्रण किया। सतना से पहुंचे हास्य कवि रवि चतुर्वेदी ने 'नमन है मेरे हिदुस्तान यहां कुछ भूखे पड़े उतान' सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। संचालन कर रहे कवि हरि नारायण हरीश ने 'आपस में मिलकर बांट लिए गहने सभी ने, अब मां की रोटियां हुई तकरार का हिस्सा, सब कुछ हुआ व्यापार का हिस्सा' सुनाकर सभी को सोचने पर विवश कर दिया। इसके अलावा कवि कुमार प्रवीण, उत्तम चौबे ने रचनाओं को प्रस्तुत किया। डा. शंभूनाथ सिंह, डा. माधव मुकुंद, झुंझुन यादव, वंश नारायण सिंह, डा. सुधाकर पांडेय, सुरेंद्र सुरेश कश्यप, चंदन सिंह, गोपाल गुप्ता, नसीम रजा, मनोज कुशवाहा आदि थे। अध्यक्षता वंशनारायण मनज ने की।

Posted By: Jagran

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