जासं, सादात (गाजीपुर) : पूर्व शिक्षामंत्री कालीचरण यादव ने शिक्षा की ज्योति जो वर्षों पहले जलाई थी उसकी समाज में एकता व समरसता का भाव आज भी विद्यमान है। उन्होंने न केवल जनपद अपितु पूरे सूबे में कम समय में ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की थी। उनके बताए हुए सिद्धांतों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

उक्त बातें हिमाचल व राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति व वर्तमान में जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के प्रो. फुरकान कमर ने बुधवार को नगर के समता पीजी कालेज में विद्यालय के संस्थापक व पूर्व शिक्षा मंत्री कालीचरण यादव की द्वितीय पुण्यतिथि पर बतौर मुख्य अतिथि कहीं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की बहुत ही चुनौतियां थीं। पूरे देश में मात्र 20-21 विश्वविद्यालय थे। 1.25 लाख छात्र ही अध्ययनरत थे। आज एक हजार से ज्यादा विश्वविद्यालय होने के करीब और पांच करोड़ विद्यार्थियों के होने के बाद भी मात्र 25 फीसद छात्र स्नातक हो रहे हैं। यह स्तर 50 से ज्यादा होना चाहिए। समाज के कमजोर वर्गो, बालिकाओं व अल्पसंख्यकों के लिए शैक्षिक क्षेत्रों में बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। कहा कि वर्तमान परिवेश में भी आज की शिक्षा विभिन्न झंझावातों से गुजर रही है, जिसे सही ढंग से निर्वहन करना हम सभी की जिम्मेदारी हैं। उन्होंने कालेज से संबंधित पत्रिका का विमोचन किया।। इसके पूर्व मुख्य अतिथि ने कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र व कालीचरण यादव की मूर्ति पर माल्यार्पण कर किया। अतिथियों की अगुवानी स्काउट कलर बैंड पार्टी व एनसीसी कैडेटों ने किया। छात्र-छात्राओं व कलाकार सूबेदार स्नेही ने गीत प्रस्तुत किया। पूर्व सांसद राधामोहन सिंह, रमाकांत यादव, रामधनी शर्मा, पूर्व प्राचार्य डा. कमलेश यादव, डा. रमाशंकर यादव, डा. चौथी यादव, प्रधानाचार्य डा. काशी नाथ यादव, राजनाथ यादव, एहतेशाम सिद्दीकी, बदरुद्दीन शास्त्री, सभाजीत सिह आदि थे। प्राचार्य डा. विंध्याचल यादव व संरक्षक ई. सभाजीत यादव ने अतिथियों का स्वागत किया। अध्यक्षता रामधनी यादव व संचालन डा. पीयूष वर्मा ने किया।

Posted By: Jagran

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