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गाजीपुर में खाद के नाम पर किसान के खाते में चढ़ा दिया 36 हजार रुपये का कर्ज, उपभोक्ता आयोग ने नोटिस किया निरस्त

By Shivanand Rai Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 10 Sep 2026 07:16 PM (IST)

गाजीपुर उपभोक्ता आयोग ने किसान के नाम पर गलत तरीके से चढ़ाए गए खाद ऋण के मामले में महत्वपूर्ण फैसला ...और पढ़ें

गाजीपुर में किसान के नाम पर फर्जी खाद ऋण, उपभोक्ता आयोग ने रद्द किया नोटिस।

गाजीपुर में किसान के नाम पर फर्जी खाद ऋण, उपभोक्ता आयोग ने रद्द किया नोटिस।

HighLights

  1. गाजीपुर उपभोक्ता आयोग ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाया।

  2. गलत तरीके से चढ़ाए गए 41,764 रुपये के ऋण को निरस्त किया।

  3. सहकारी समिति को किसान को 8,000 रुपये भुगतान का आदेश।

जागरण संवाददाता, गाजीपुर। साधन सहकारी समिति की ओर से किसान के नाम पर खाद का ऋण चढ़ाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, गाजीपुर ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने किसान के नाम जारी 41,764 रुपये के डिमांड नोटिस को निरस्त करते हुए साधन सहकारी समिति के तत्कालीन सचिव समेत संबंधित पक्षों को किसान को 5,000 रुपये क्षतिपूर्ति और 3,000 रुपये वाद व्यय के रूप में भुगतान करने का आदेश दिया है। वहीं जिला सहकारी बैंक को मामले में किसी भी प्रकार के दायित्व से मुक्त कर दिया गया।

मामला परिवाद संख्या 12/2022 में राजेश कुशवाहा पुत्र केदार कुशवाहा निवासी ग्राम तिसड़ा, पोस्ट बहरियाबाद से संबंधित है। आयोग के 10 सितंबर 2026 के निर्णय के अनुसार परिवादी का आरोप था कि वह किसान है और विपक्षीगण द्वारा संचालित साधन सहकारी समिति का सदस्य होने के नाते समय-समय पर खाद-बीज खरीदता था।

परिवादी के अनुसार उसने 21 अगस्त 2020 को किसान क्रेडिट कार्ड से चेक के माध्यम से 3,654 रुपये का भुगतान कर तीन बोरी डीएपी खाद खरीदी थी। आरोप था कि इसके बाद उसके नाम पर गलत तरीके से 30 बोरी खाद की खरीद दर्शाते हुए 41,764 रुपये की बकाया राशि का डिमांड नोटिस जारी कर दिया गया। इस संबंध में उसने थाना बहरीयाबाद में भी प्रार्थना पत्र दिया था।

जांच में सामने आई गड़बड़ी
आयोग के समक्ष प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, गाजीपुर की ओर से कराई गई जांच का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में तत्कालीन सचिव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बताया गया कि तीन बोरी खाद के चेक पर वितरण कर सदस्य के नाम 30 बोरी खाद का ऋण अंकित कर दिया गया। जांच में यह भी पाया गया कि चेक में मूल रूप से 3,654 रुपये दर्ज थे, जबकि मूल्य वाले अंक में उसे 36,000 रुपये कर दिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार शब्दों में छत्तीस हजार रुपये नहीं लिखा गया था।

आयोग ने कहा कि उर्वरक वितरण रजिस्टर और चेक के अवलोकन से स्पष्ट है कि परिवादी के नाम पर वास्तविक खरीद से अधिक खाद का ऋण दर्शाया गया। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए परिवादी को हुई शारीरिक, मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए विपक्षी संख्या एक और तीन को उत्तरदायी माना।

41,764 रुपये की वसूली का नोटिस निरस्त

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि विपक्षी संख्या एक की ओर से परिवादी के नाम जारी 12 जून 2021 का 41,764 रुपये का डिमांड नोटिस निरस्त किया जाता है। साथ ही विपक्षी संख्या एक और तीन को निर्देश दिया गया कि वे परिवादी को 5,000 रुपये क्षतिपूर्ति तथा 3,000 रुपये परिवाद व्यय का भुगतान करें।

निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किए जाने पर परिवादी को संबंधित पक्षों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई है। आयोग ने जिला सहकारी बैंक को इस मामले में किसी भी दायित्व से मुक्त कर दिया।