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150 वर्ष पहले गिरमिटिया मजदूरी करने गाजीपुर से गए सूरीनाम, प‍ितरों को पूजने की कामना से अब तलाश रहे पूर्वजों का घर

By Vindeshwari Singh Edited By: Abhishek sharma
Published: Thu, 15 Oct 2026 04:38 PM (IST)

150 साल पहले गिरमिटिया मजदूरी करने सूरीनाम गए रामनन्दन लाल के वंशज अपनी जड़ों की तलाश में गाजीपुर के खानपुर ...और पढ़ें

सूरीनाम से गाजीपुर पहुंचे गिरमिटिया मजदूरों के वंशज, डीएनए से तलाश रहे पूर्वजों की जड़ें, महेन्द्रलाल ने द‍िया डीएनए सैंपल।

सूरीनाम से गाजीपुर पहुंचे गिरमिटिया मजदूरों के वंशज, डीएनए से तलाश रहे पूर्वजों की जड़ें, महेन्द्रलाल ने द‍िया डीएनए सैंपल।

HighLights

  1. 150 साल बाद सूरीनाम से खानपुर लौटे वंशज।

  2. पूर्वजों की पहचान के लिए लिया गया डीएनए सैंपल।

  3. गाजीपुर के खानपुर में अपनी जड़ों से जुड़ने का प्रयास।

जागरण संवाददाता, खानपुर (गाजीपुर)। करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले गिरमिटिया मजदूरी करने खानपुर से सूरीनाम गए रामनन्दन लाल के वंशज अपनी जड़ों को ढूंढते हुए मंगलवार को खानपुर पहुचे थे। चंचल लाल श्रीवास्तव ने बताया कि सूरीनाम से आये मोहनलाल और शारदा प्रसाद ने अपने पूर्वजों की पहचान और खानदान चिन्हित करने के लिए पिताजी महेन्द्रलाल श्रीवास्तव का डीएनए सेंपल लिया।

जिससे छह पीढ़ी पूर्व के पुर्वजों को वर्तमान पीढ़ी के साथ रक्त संबंध के माध्यम से जोड़ा जा सके। महेन्द्रलाल श्रीवास्तव ने बताया कि वर्षों पहले रामनन्दन के पौत्र रघुनन्दन और हरिनंदन हुए। जिनमें हरिनंदन का परिवार सूरीनाम चला गया। वर्षों बाद अपनी जड़ें तलाशते हुए उनके वंशज मंगलवार को खानपुर आये। जहां अपने परिवार के साथ सटीक संबंधों की जोड़ने के लिए वैज्ञानिक विधि से जानकारी जुटाने में लग गए है।

इसके पहले कई बार सूरीनाम से सन्देश आते थे जिसे हमलोग सुन कर अनसुना कर देते थे। जब मोहनलाल के वंशावली से कुछ लोग अपनी जड़ें तलाशते घर आये तो उनसे मिलकर अच्छा लगा। करीब दो घंटे तक खानपुर गांव और बाजार के विषय में जानकारी लेने के बाद मौसमी खेती और जलवायु की जानकारी ली।

चंचल लाल ने बताया कि मोहनलाल अपने साथ अपनी बेटी और दामाद के साथ खानपुर स्थित घर आकर बेसन की लड्डू और चाय पीने के बाद डीएनए के लिए रक्त का नमूना लिया। मोहनलाल को सूरीनाम विदेश मंत्रालय में भारतवर्ष के उत्तरप्रदेश में गाजीपुर का जिक्र आते ही उन लोगों की उत्सुकता बढ़ गयी थी। सैदपुर तहसील के पास खानपुर से उनके पूर्वजों के आने की जानकारी मिली थी।

उसी के बाद अपनी भारत यात्रा के दौरान पैतृक जड़ की तलाश करते खानपुर आने का कार्यक्रम बना लिया। खानपुर के स्वजन भी अपने समृद्ध विरासत से जुड़ने पर गौरवान्वित महसूस कर रहे है। जिनके पूर्वज देश से सुदूर जाकर अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव महसूस करते है।