गाजीपुर में नगर पालिका क्षेत्र में 20700 निजी मकान, जर्जर भवनों का नहीं है कोई रिकॉर्ड
गाजीपुर में जर्जर मकान का बारजा टूटने से एक महिला की मौत हो गई, जिससे नगर पालिका की जर्जर भवनों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
-1789829830488_m.webp)
नगर पालिका क्षेत्र में 20,700 निजी मकान।
HighLights
गाजीपुर में जर्जर मकान का बारजा टूटने से महिला की मौत।
नगर पालिका के पास जर्जर भवनों का कोई रिकॉर्ड नहीं।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल, अधिकारियों को भी जानकारी नहीं।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। शहर में जर्जर निजी भवनों की पहचान और उनकी निगरानी की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। नगर पालिका क्षेत्र में करीब 20,700 भवनों का आंकड़ा है लेकिन इनमें कितने जर्जर हैं, कितनों को चिह्नित किया गया और भवन स्वामियों को कितने नोटिस दिए गए इसका कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
शुक्रवार को मछली बाजार स्थित गुदड़ी में जर्जर मकान का बारजा टूटने से 40 वर्षीय सायरा बानो की मौत हो गई। नगर पालिका प्रशासन के पास इस वर्ष जर्जर भवनों के चिह्नीकरण अथवा कार्रवाई का कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं है। अधिकारियों के अनुसार ऐसे मामलों की निगरानी किसके पास हैं, उन्हें पता नहीं है।
शहर के पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों में कई मकानों के बारजे, छज्जे और दीवारें लंबे समय से मरम्मत की मांग कर रही हैं। जोखिम वाले हिस्सों की पहचान कर भवन स्वामी को नोटिस देना जरूरी है लेकिन नगर पालिका के पास इसका ब्योरा न होना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। मछली बाजार की घटना इसका उदाहरण है।
शुक्रवार शाम सायरा बानो ऊपरी मंजिल पर कपड़े डालने के बाद स्टूल लेकर बारजे पर बैठी थीं। इसी दौरान वह टूट गया और करीब दो मंजिल की ऊंचाई से गिरने पर उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
जर्जर भवनों से जुड़े मामलों की निगरानी और अधिकांश कार्य उपजिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम विनियमित क्षेत्र द्वारा देखा जाता है। उनके पास इसका कोई आंकड़ा नहीं है। -परमानंद अवर अभियंता, नगर पालिका परिषद।
हमारे पास एक ही जेई हैं। यदि जर्जर भवनों से संबंधित कोई शिकायत हमारे पास आती है तो ही जांच कराई जाती है। -डॉ. धीरेंद्र राय, ईओ।
