गाजीपुर में जीआईएस सर्वे के नोटिस से गृहकर दाताओं को हजारों का झटका, 40 हजार से एक लाख तक की मांग
गाजीपुर नगर पालिका के जीआईएस आधारित गृहकर निर्धारण पर सवाल उठ रहे हैं, जहां नोटिसों में गलत माप और 10-15 साल का बकाया एक साथ जोड़ा जा रहा है।

इस फोटो को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
जीआईएस आधारित गृहकर निर्धारण प्रक्रिया पर उठे सवाल।
नोटिसों में गलत माप, वर्षों का बकाया शामिल।
भवन स्वामियों पर हजारों-लाखों का अतिरिक्त बोझ।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। नगर पालिका के जीआईएस आधारित गृहकर निर्धारण और वसूली की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। गृहकर व जलकर के बकाये की वसूली के लिए जारी नोटिस में कहीं गली की वास्तविक चौड़ाई से अधिक माप दर्ज होने की शिकायत है तो कहीं 10 से 15 वर्ष तक का बकाया एक साथ जोड़ दिया गया है। इससे लोगों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है।
कई भवन स्वामियों को 40 हजार से एक लाख रुपये तक बकाया जमा करने की नोटिस मिली है, जबकि कुछ का दावा है कि वे वर्ष 2025 तक कर जमा कर चुके हैं। आरोप है कि 10 फीट चौड़ी गली को 10 मीटर दर्शाकर अधिक दर से कर निर्धारित किया जा रहा है, जबकि ऐसी चौड़ी सड़कें मुख्य मार्गों को छोड़कर अधिकांश कालोनियों में नहीं हैं। ऐसे में जीआइएस सर्वे के आधार पर तैयार नोटिसों की शुद्धता और बकाये के निर्धारण पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
योजनाओं से जोड़ा था 3,500 से अधिक परिवार
गांव-कस्बों में निवेश के नाम पर लोगों का भरोसा जीतना और फिर उनकी गाढ़ी कमाई समेट लेना। ममतांजलि सर्विस साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और अंजली ग्रुप पर लगे 400 करोड़ रुपये की ठगी के आरोपों के पीछे इसी तरह के नेटवर्क की कहानी सामने आ रही है।
गिरोह ने खुद को एक सामान्य कंपनी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि लोगों के बीच प्रभाव जमाने के लिए 31 सदस्यीय मैनेजमेंट कमेटी का ढांचा खड़ा किया था। इसमें किसी को बिग बास, किसी को सुप्रीमो, तो किसी को स्टार प्रचारक बनाया गया।
स्वास्थ्य, वित्त, अनुशासन, आईटी, युवा शक्ति और सांस्कृतिक मंच जैसे विभागों के पद भी बांटे गए, ताकि संगठन व्यवस्थित और प्रभावशाली नजर आए।
