गाजीपुर में 35 साल पहले राष्ट्रपति पदक से सम्मानित शिक्षक की पिटाई में चार सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी भेजे गए जेल
गाजीपुर में राष्ट्रपति पदक से सम्मानित सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक कुबेर नाथ सिंह की 35 साल पुरानी पिटाई के मामले में चार ...और पढ़ें

गाजीपुर में 35 साल पुराने शिक्षक पिटाई मामले में चार सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी जेल भेजे गए।
HighLights
35 साल पुराने शिक्षक पिटाई मामले में आत्मसमर्पण।
चार सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों को न्यायिक हिरासत में भेजा।
उच्च न्यायालय के कड़े रुख के बाद हुआ समर्पण।
जागरण संवाददाता, गाजीपुर। राष्ट्रपति पदक से सम्मानित जूनियर हाईस्कूल के सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक कुबेर नाथ सिंह की पिटाई के 35 साल पुराने मामले में आरोपित चार सेवानिवृत्त पुलिसकर्मियों ने मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया।
अदालत ने चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में सेवानिवृत्त दारोगा सुदामा यादव, हेड कांस्टेबल धर्मदेव तिवारी, कांस्टेबल ईश नारायण लाल व भीमसेन शामिल हैं। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद दोषियों को समर्पण करना पड़ा।
घटना 14 अप्रैल 1991 की है। मरदह थाना क्षेत्र के बरियाहां गांव में भूमि विवाद की जांच करने पहुंची पुलिस ग्रामीणों से गालीगलौज कर रही थी। पास में बैठे प्रधानाध्यापक कुबेर नाथ सिंह ने जब इसका विरोध किया तो पुलिसकर्मी उग्र हो गए। इसके बाद शिक्षक को जबरन जीप में खींचकर बेदौली पुलिया और गाईं गांव के पास डंडे से पीटा। उनका हाथ टूट गया और वह लहूलुहान हो गए।
पुलिस ने दोनों पक्षों की तहरीर लेकर प्रधानाध्यापक का भी चालान कर दिया था। पीड़ित के पुत्र और जेपी विश्वविद्यालय, छपरा के पूर्व कुलपति प्रो. हरिकेश सिंह की शिकायत पर शासन ने सीबीसीआइडी जांच कराई। जांच में पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आने के बाद वर्ष 1993 में मरदह थाने में 11 पुलिसकर्मियों समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष एमए काजी समेत अन्य दोषियों को पहले ही सात-सात वर्ष के कारावास की सजा हो चुकी है।
अपील खारिज होने के बाद हाईकोर्ट पहुंचे थे अभियुक्त
मामले के शेष चार अभियुक्तों को सीजेएम न्यायालय ने तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अपर जिला जज संजय के. लाल की अदालत ने भी उनकी अपील खारिज कर दी थी लेकिन इसके बाद उन्हें जमानत मिल गई थी। इसके बाद अभियुक्तों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में निगरानी याचिका दाखिल की।
हाईकोर्ट ने मौखिक निर्देश दिया कि अभियुक्तों के आत्मसमर्पण किए बिना याचिका पर सुनवाई नहीं होगी। इसके बाद चारों ने सीजेएम न्यायालय में समर्पण कर दिया। मामले में वादी पक्ष की ओर से गाजीपुर न्यायालय में अधिवक्ता संजय राय तथा हाईकोर्ट में अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय और प्रखर कुमार श्रीवास्तव ने पैरवी की।
