जागरण संवाददाता, लौवाडीह (गाजीपुर) : बीते वर्ष 2016 में आई बाढ़ से नष्ट हुई धान फसल की क्षतिपूर्ति बीमा राशि की दूसरी किस्त का इंतजार आज भी लौवाडीह, चांदपुर, बेलेसड़ी, जोगामुसहिब, मुर्तजीपुर समेत करइल के कई गांव के किसान कर रहे हैं। इसको लेकर न तो किसी अधिकारी को इसकी चिता है और न ही इंश्योरेंस कंपनी को। उस समय बाढ़ का केंद्र लौवाडीह था, जिससे धान समेत सभी फसल नष्ट हो गई थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सभी किसानों को पहली किस्त भेज दी गई लेकिन इंश्योरेंस कंपनी और कृषि अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसान क्षतिपूर्ति राशि से वंचित हैं। किसानों ने जिलाधिकारी के यहां प्रार्थना पत्र भी दिया था लेकिन इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सियाड़ी के किसान इस संबंध में हाइकोर्ट गए थे। हाइकोर्ट ने किसानों को क्षतिपूर्ति राशि देने का निर्देश भी दिया लेकिन कई गांव के लोगों को इसका लाभ नहीं मिला। किसान संजय राय, सतीश राय, मनोज राय, संजय मिश्रा, जितेंद्र यादव ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड से राशि बीमा के नाम पर काट ली जाती है लेकिन जब किसानों को क्षतिपूर्ति देने की बात आती है तो अधिकारियों और इंश्योरेंस कंपनियों की मिलीभगत के चलते लाभ देने से वंचित कर दिया जाता है। अगले वर्ष से फसल बीमा न कराने का निर्णय लिया गया है।

Posted By: Jagran

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