जागरण संवाददाता, खानपुर(गाजीपुर): क्षेत्र के भुजहुआ में पूर्व सैनिकों ने थलसेना दिवस पर बैठक कर भारतीय थलसेना के शौर्य का बखान किया। भारतीय थल सेना के 74वें स्थापना दिवस पर तिरंगा फहराकर पूर्व सैनिकों ने सलामी दी। पूर्व स्क्वाड्रन लीडर हरिहर दीक्षित ने कहा कि जिस सैन्य शक्ति के तौर पर भारत विश्व में सबसे बेहतर लड़ाका के रूप में पहचाना जाता है, थल सेना उसी शक्ति की आत्मा का मूल है।

थलसेना में शहीदों की शहादत के मूल्य का गौरव, मातृभूमि के प्रति जान लुटा देने की हिम्मत है और हर हाल में देश की रक्षा सर्वोपरि मानने की जुनून है। पूर्व सैनिक पंकज विश्वकर्मा ने कहा कि मां भारती की रक्षा में पल-पल मुस्तैद देश के पराक्रमी सैनिकों और उनके परिजनों को सेना दिवस की हार्दिक बधाई देने का अवसर है। हमारी सेना सशक्त, साहसी और संकल्पबद्ध है जिसने हमेशा देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है। देशवासियों को हमेशा अपने सेनाओं पर गौरवान्वित होना चाहिए। सतीश दीक्षित ने बताया कि अदम्य साहसी, अति अनुशासित, अद्भुत पराक्रमी भारतीय सेना के वीर जवान मातृभूमि की रक्षा के लिए प्रति पल अपना सर्वस्व अर्पण करने को तत्पर भारतीय सेना के जवानों की कर्तव्यनिष्ठा व नि:स्वार्थ सेवा भावना पर हमें गर्व है। पहाड़ों और जंगलों की लड़ाई में भारतीय सेना को पूरे विश्व में सर्वश्रेष्ठ सेना का गौरव हासिल है। कामेश सिंह, रजनीकांत, गुड्डू यादव, प्रमोद यादव, दरोगा दीक्षित आदि रहे।

Edited By: Jagran